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मित्रगण! जैसा कि आप सभी को विदित ही होगा कि मैंने अपनी एक कहानी में एक जिन्नी हाजिरा का उल्लेख किया था, और मैंने उसका दावतनाम कुबूल किया था, ईद-उल-मिल...
"तुम लोग कहाँ के रहने वाले हो? मैंने पूछा, "ज़िर्का! बड़ी फहद!" शेख ने कहा! "अच्छा! अच्छा! तो अब वहीँ जाओगे सारे?" मैंने पूछा, "अगर आप मुनासिब समझ...
का लड़का है, या यूँ कहो की अभी बच्चा है! वो केवल मदद-ओ-इमदाद के लिए आया था! फ़क़ीर ने अपनी सारी ताक़तें इल्मात कर चौकपाबंद कर दी थीं! मैंने उसकी ताक़तें ना...
"हाफ़िज़ साहब! मैंने कोई वाहियात बात नहीं की, अब आप मझे बताएं, कि आप उनको आज़ाद करेंगे या मै आज़ाद करवा दूँ?" मैंने कहा, "वाह जनाब वाह! हमारी जगह पर आकर...
"हाँ शर्मा जी, मैंने कह तो दिया लेकिन सीधे तौर पर वो मेरा शत्रु तो है नहीं, किया क्या जाए ज़रा विचार करो!" मैंने कहा, "ठीक है सोचता हूँ इस बारे में" ...
"तुगलकाबाद किले में" उन्होंने बताया, "किले में?" मैंने हैरत से पूछा, "हाँ" हाज़िरा ने कहा, "उन्हें किसने क़ैद किया है?" मैंने पूछा, "किसी ने पकड़...
बताई! उन्होंने बताया कि अगर इबु-खबीस की आँखों पर पट्टी बाँधी जाए और तिलिस्मी जगह पर अगर उसको धक्का मार दिया जाए तो कैसा भी तिलिस्म हो वो तोड़ डालता है!...
किया! कलुष-मंत्र पढ़ा और अपने और शर्मा जी के नेत्र इस से पूरित किये! हमने फिर आँखें खोल दीं! सामने का तो जैसे नज़ारा ही बदल गया था! सामने तीन औरत जिन्...
अपनी जान बचाई! अब वहाँ मजदूर काम करने से मना करने लगे! बुलडोज़र वालों ने मना कर दिया! उनके साथ साथ सभी को खटका हुआ कि वहाँ अवश्य ही कोई बला है जो यहाँ ...
और मैंने उसको भी मुक्त किया!वो पहलवानन संग ही आ गयी मेरे!रखा है उसको कहीं और, सोचता हूँ, उसे भी मुक्त कर दूँ,फिलहाल में उसका कोई इरादा तो है नहीं ऐसा!...
बस वो सामान ही बचा था!को था किसी और का,हड़पा किसी और ने,खून-खच्चर हुआ,मासूम हलाक़ हुए,गाँव खत्म हो गया,लेकिन वो धन, जस का तस पड़ा रहा गया!मैंने उस स्थान ...
उल्टा लटका दिया सभी को हवा में उसने,और हुआ लोप,ले गया था अपने साथ!कुटाई तो करता ही उनकी वो!चिढ़ता है बहुत इन प्रेतों से!और प्रेत तो उसे देख,ऐसे कांपते ...
"धीमणा? तू कितना प्रबल था! लेकिन सब बेकार! इच्छाओं का गुलाम! मैं जानता था कि तेरा हश्र यही होगा! सबकुछ गंवा बैठा तू! अब बता, क्या करूँ मैं तेरा?" पूछा...
मैं आया आगे,और फेंक दी मिट्टी!मिट्टी जैसे ही भूमि पर गिरी!भूमि में कम्पन्न हुआ!अब नहीं लोप हो सकते थे वो!अब मात्र प्रेत थे!साधारण से प्रेत!"शर्मा जी? ...
