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"हाजिरा, मुझ से इतनी मुहब्बत ना करो!" मैंने कहा, "कोई जुर्म आयद होता है मुझ पर?" उसने पूछा, "हाँ!" मैंने कहा, "कैसा जुर्म?" उसने पूछा, "मुहब्ब...
"हाजिरा?" मैंने कहा, "जी कहिये?" उसने गिलास उठाते हुए कहा, "अब भूख लगी है मुझे तो! मैंने कहा, "खाना तैयार है आपका, बताएं, लगा दूँ?" उसने कहा, ...
"हाजिरा, समझा करो, समझा करो" मैंने कहा, "नहीं मै नहीं जानती" उसने कहा और मुझे और कस लिया! मेरी साँसें अब गरम हो गयीं थीं! मै ऐसा महसूस कर रहा था कि ...
अब मैंने उसको अपने आप से हटाने की कोशिश की, लेकिन मेरे हाथ मेरे साथ ही धोखा कर रहे थे! मै हटाना चाह रहा था, लेकिन वो सुख मुझे ऐसा करने नहीं दे रहा था,...
"सोचोगे तो नहीं?" उसने पूछा, "अ..ठीक है, नहीं सोचूंगा!" मैंने कहा, "जो मै मांग रही हूँ वो देना होगा!" उसने मुस्कुरा के कहा, "ठीक है, मांगो" मैंन...
"आँखें खोलो हाजिरा" मैंने कहा, उसने धीरे धीरे आँखें खोलीं और मेरी आँखों में आँखें डालीं! "अब बताइये, फिर?" उसने धीरे से बोला, "फिर!!! कभी फिर! आ...
"बेपनाह मुहब्बत" उसने कहा, "मेरी बात मान जाओ फिर!" मैंने कहा, "अच्छा ठीक है, लेकिन मुझे दस्तक देते रहना, बोलिए?" उसने लरजते हुए कहा, "मंजूर! दस्...
अपने सीने से लगाया और कहा, "मै ये नहीं चाहूँगा कि तुम्हारा बदन किसी और के आगोश में आये" मैंने इतना कहा और वो मुझसे दूर हो गयी! हैरत से! लेकिन आँखों ...
कराह! एक मीठे दर्द की सी कराह! उसने भी मुझे अपने आगोश में ले लिया! मेरे बदन में जैसे काम-प्रदाह भड़क उठी! लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं था! एक आदमजात उसे ...
उसके बाद हाजिरा ने मुझे उस कमरे से भी निकाल एक दूसरे कमरे में ले गयी, ये कमरा बेहद ख़ास था! मोटे मोटे बेल-बूटे बने हुए थे दीवारों पर, सुर्ख लाल रंग के!...
उसने फ़ौरन अपने हाथ मेरी कमर में डाले और मेरे से चस्पा हो गयी! सच कहता हूँ, मुलाक़ात तो मै कभी महीने में दो महीनों में कर ही लेता हूँ, लेकिन वो मुझ से च...
अब वो सच में ही शर्मा गयी! मै उसके पास गया थोडा और बोला, "एक जिन्नी! और एक आदमजात से शर्म?" "ऐसा क्यूँ कहा आपने?" उसने थोडा नाराजगी से कहा, "जो सच...
बदन की खूबसूरती को मैंने उसके पाँव से लेकर सर तक देखा! उसने शर्मा के आँखें नीचे कर लीं! "कितनी खूबसूरत हो तुम!" मैंने कहा! वो चुप रही! बिलकुल चुप!...
"क्या मै पूछ सकता हूँ कि काजी साहब के यहाँ क्या करने गयी हैं वो?" मैंने पूछा, "जी आपको तो मालूम ही होगा, गाँव छोड़ने से पहले और किसी भी आदमजात को मेह...
दरबान जिन्न ने झुक कर सजदा किया और फिर रास्ता छोड़ के खड़ा हो गया, मतलब था कि हम अन्दर आ जाएँ! मैंने ताहिर का शुक्रिया अदा किया और उसने भी हंस के जवाब द...
