श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“बैजू! बच सके तो बच ले!” मैंने कहा, और ये कहते ही कपाल कटोरे में मदिरा परोस दी! और सारी की सारी गटक गया मैं, अब मुझमे ऊर्जा आ गयी थी! नयी ऊर्जा! अब ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

उसने ऊपर देखा! फिर पीछे देखा, फिर सामने! “बैजू! अभी भी समय है!” मैंने उसको याद दिलाया! उसने मुझे गालियां दीं! लम्बी-चौड़ी! काश कि वो खाली हो गय...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मैं भूमि पर लेटे लेटे ही हंस पड़ा! मेरे श्वास के कारण उछली मिट्टी मेरे मुंह में घुस गयी, कुछ नथुनों में भी! मुझे खांसी आ गयी और फिर हंसी! मैं पेट पकड़ क...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

भोग सजाना आरम्भ किया! और अलख के पास ले आया! और फिर अन्तिम मंत्र पढ़ने आरम्भ किये बैजनाथ ने! यहाँ! यहाँ मैंने भामा का मंत्रोच्चार क्लिष्ट कर दिया था...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मैंने उसको जस का तस छोड़ा! रूद्रा! यही कहा था उसने! मैंने अपना महासिद्ध कपाल उठाया, उसके सर पर एक दीपक रखने के लिए अलख के पास रखा और दीपक रख दिया, ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“किसका अंत होगा ये तो अभी पता चल जाएगा बैजनाथ!” मैंने कहा, उसने फिर से एक ज़ोर का अट्ठहास लगाया! “अब तक तू सब सम्भालता रहा! अब नहीं सम्भाल पायेगा!”...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

संग्राम कुछ पल ही दूर था अब! दोनों ओर महामंत्र पढ़े जा रहे थे! एक दूसरे के प्रबल शत्रु! परन्तु अब मैं बैजू को शत्रु नहीं मान रहा था, वो नासमझ था, उसक...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

तभी कर्ण-पिशाचिनी का स्वर मेरे कानों में गूंजा ‘तृंगगणिका’! तृंगगणिका! पूर्ण सिद्धि प्राप्त था ये बैजू! यदि उसने तृंग को सिद्ध किया था तो सच में वो ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

अब मैंने अट्ठहास लगाया! “खामोश!” वो चीखा! मेरा अट्ठहास उसकी रीढ़ की हड्डी को जड़ कर गया था! “अभी भी समय है बैजू!” मैंने कहा, उसने कोई उत्तर नहीं...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

और उधर!! उधर…. उधर तो जैसे त्राहि त्राहि मच गयी! बैजू को काटो तो खून नहीं! जैसे किसी को अपना काल सामने आता दीख रहा हो, ऐसा बैजू खड़ा वहाँ! गुस्से म...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“प्रकट हो!” वो बोला, “प्रकट हो!” उसके औघड़ बोले! और फिर वहाँ चीत्कार सी मच गयी! एडाल सुंदरी की उपसहोदरियां शून्य में से प्रकट हुईं और कुछ सेवक भी प...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

वीर की अलख जागृत हो गयी थी! किसी भी पल मेरे शरीर को एक ऊर्जा ग्रसित करने वाली थी! यही थी उस एडाल सुंदरी से भिड़ने की शक्ति! मैंने और केंद्रित होने के ल...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

उसने फिर से थूक फेंका और बैठ गया अपने आसन पर! मैं भी बैठ गया और अब मैंने अर्जी लगा दी मोहम्म्दा वीर की! द्वन्द आधे में आ चुका था! अब क्या होगा? ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“थू!” उसने थूक फेंका! “तभी गाल बजा रहा है!” मैंने कहा, “तेरा काल हूँ मैं! समझा?” चिल्लाया बैजू! “कौन किसका काल है, अभी निर्णय हो जाएगा! कुत्ते क...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मुस्कुराया! “तेरा खेल ख़तम!” उसने कहा, मैं फिर मुस्कुराया! “तू और ये! मरेंगे एक साथ!” वो बोला, उसने मेरी साध्वी की तरफ इशारा किया था! मैं फिर...

1 year ago
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