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उसकी पुत्री नुपुर ही बता सकते थे! अब मै क्रिया से उठा, अलख-नमन किया और कक्ष से बाहर आ गया! शेष रात्रि सोने में बिता दी! प्रातः हुई,फिर करीब दस बजे...
जी!” वे बोले शर्मा जी ने सामान लिखवा दिया उनको! उसके बाद हम वहाँ से वापिस आ गए, सफलता का एक चरण तो पूरा हो चुका था, अब शेष पर कार्य करना था, इ...
“जी” उसने फिर से गर्दन हिलाई, अभी कोई पांच मिनट बीते होंगे, नुपुर को उबकाई शुरु हो गयीं! उसके पास तसला रख दिया गया, उसने उलटी करनी शुरू कर दी, उलटी ...
“आप पहले शांत हो जाइये” मैंने कहा, उन्होंने सिसकियाँ थामीं अपनी! “सुनिए, अब कैसी है, कोई फर्क दिखा उसमे?” मैंने पूछा, “गुरु जी, आज आठ महीनों के ...
फिर मैंने रास्ते में एक जगह गाड़ी रुकवाई और कुछ पत्ते तोड़ लिए कनेर के और फिर चल पड़े हम आगे! आगे जाकर हमने गाड़ी गाज़ियाबाद के लिए मोड़ दी, कुछ ही देर मे...
मेरी नींद करेब सात बजे खुली, मै स्नान करने के पश्चात सीधा ही अपने क्रिया-कक्ष में चला गया, और फिर अलख उठा दी, अलख-भोग दिया और फिर मैंने क्रिया आरम्भ क...
“हाँ, ये तो है” उन्होंने कहा, “बताओ आठ महीने से बेचारी बिस्तर पर पड़ी है” उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर किया, “हाँ, बेचारी कष्ट भोग रही है, और साथ के साथ उस...
“अच्छा, तो क्या बताया उस बाबा ने?” मैंने पूछा, “जी उसने बताया कि लड़की का बचना मुश्किल है अब, मसानी-क्रिया अंपा काम कर चुकी है, अब तो इसकी सेवा कर लो...
“हम्म, फिर, इलाज हुआ?” मैंने पूछा, “बाबा ने लड़की को देखा और कहा कि उसके ऊपर मसान छोड़ा गया है, तीन रातें नुपुर को उनके शमशान में रुकना होगा” वे बोले,...
“ओह! फिर?” मैंने पूछा, हम उसको वापिस घर ले आये, यहीं इलाज करते रहे उसका, उसको समय समय पर अस्पताल ले जाते थे हम” वे बोले, “अच्छा, फिर?” मैंने पूछा,...
मेरा कार्य समाप्त हो गया था! वे तीनों इस लोक से मुक्त हो गए थे! मैंने प्रधान को कह दिया कि वो अष्टमी के दिन वहाँ एक भोज आमंत्रित करे! वे प्रेतात्माए...
अब मुझे उनका मुक्ति-कर्म करना था! अतः अब मुझे उनको पकड़ना था! नहीं तो कोई और सक्षम-तांत्रिक इन फंसी हुई आत्माओं का अनुचित लाभ उठा सकता था, इसीलिए मैंने...
जानकारी देती है! लेकिन इसको सिद्ध करना अत्यंत क्लिष्ट एवं प्राणहारी सिद्धियों में से एक है! कई साधक सीधे-सीधे इसको सिद्ध करने लगते हैं, बिना इस से पहल...
अपने काका के काफिले की! बनैटा जाने के लिए! इसके आगे उन्हें कुछ याद नहीं था! अब यही ये रहस्य छिपा था! यही मुझे जानना था! “सुनो, तुम जहां छिपे हो छिप ...
