श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०११ जिला गोरखपुर की एक घटना

“ये बाबा लोग हैं, ये बता देंगे, बुला देंगे उसको” वो बोलीं,इतना भोलापन! मेरा जी अंदर से रो पड़ा ये सुनकर…..“आइये, अंदर आइये” मैंने कहा,‘अरे सुनिये तो सह...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ जिला गोरखपुर की एक घटना

माता जी शब्द सुना तो और बिफर पड़ीं, लगे लग गयीं, मैंने उनको शांत किया, “बताइये माता जी? क्या बात है?” मैंने पूछा, वे सिसक रही थीं, सांस बन नहीं रही...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

आज कल्पि खुश है! आगे पढ़ाई की है उसने! दिल्ली आती रहती है मुझसे मिलने! वही छेड़छाड़ और वही हठ! लेकिन अब वो मेरी मंशा जान गयी है! कल्पि जैसी न जाने कितन...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“हाँ मतंगनाथ! तूने कहा था कि रमा भी यहाँ नहीं रहेगी, बुला उसे मैं लेकर जा रहा हूँ उसे भी!” मैंने कहा, अब वो और झेंपा! “सुनिये, सुनिये तो सही! देखि...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“आइये” सुर्रा ने कहा, उसका नाम सुरेश था, लेकिन बोली में उसका नाम सुर्रा हो गया था! हम चले उसके पीछे! वो हमे ले गया एक कक्ष की और और वहाँ जाकर रु...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

उसने मुझे नहीं छोड़ा! बालकों की तरह से चिपक गयी थी! “कल्पि?” क्या हुआ कल्पि?” मैंने पूछा, वो नहीं मानी, चिपके रही! “कल्पि, तुमने मेरा बहुत साथ ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मैंने उसको हलके हलके थप्पड़ भी लगाए! तभी मुझे ध्यान आया पाने त्रिशूल का! मैंने त्रिशूल की फाल को अभिमंत्रित किया और उसको कल्पि के सर से छुआ दिया! भ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

लक्ष्य-भेदन हो गया था! मैंने अब उन्ने मंत्र पढ़े और अगले ही पल वे सभी के सभी लोप हो गए! आंधी की तरह से आये चक्रवात की तरह से गुजरे, तूफ़ान की तरह से...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

बंद हो गया भाग्य बैजू का उसी क्षण! और अगले ही क्षण वहाँ बैजू के समख प्रकट हो गए वे सब! शिखर पर सी बैठी हुई कालकलिका ने अट्ठहास किया! उसके सेवक और से...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

झोंका! अलख अपने चरम पर पहुंची! मंत्रोच्चार से मसान ने भी कन्नी काट ली! वो शांत हो छिप गया किसी कोने में! वहाँ औघड़ कांपने लगे! लेकिन बैजू के कोप से ब...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

कालकलिका! कालकलिका! एक महाशक्ति की प्रधान सहोदरी! मित्रगण तैंतीस करोड़ की संख्या है जगत में, गिनेंगे तो उँगलियों पर आ जायेंगे आपके सब के सब! ये ज...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

“बैजू! बच सके तो बच ले!” मैंने कहा, और ये कहते ही कपाल कटोरे में मदिरा परोस दी! और सारी की सारी गटक गया मैं, अब मुझमे ऊर्जा आ गयी थी! नयी ऊर्जा! अब ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

उसने ऊपर देखा! फिर पीछे देखा, फिर सामने! “बैजू! अभी भी समय है!” मैंने उसको याद दिलाया! उसने मुझे गालियां दीं! लम्बी-चौड़ी! काश कि वो खाली हो गय...

1 year ago
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RE: वर्ष २०११ काशी की एक घटना

मैं भूमि पर लेटे लेटे ही हंस पड़ा! मेरे श्वास के कारण उछली मिट्टी मेरे मुंह में घुस गयी, कुछ नथुनों में भी! मुझे खांसी आ गयी और फिर हंसी! मैं पेट पकड़ क...

1 year ago
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