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अब उस लड़की ने अपनी ऊँगली पर चाक़ू की नोंक रखी और चाक़ू खींच दिया! आश्चर्य! रक्त की बूँदें छलछला गयी ऊँगली पर! उसने अपनी ऊँगली दिल्लू को दिखाई! ये देख ...
उसके आंसूं बहने लगे झर झर! चेहरे पर काजल फ़ैल गया उसके! दिल्लू ने देखा तो झटका खाया! माया के आसूं? ये कौन सी दुर्लभ माया है? ओह! ये कैसी परीक्षा है? ...
“दिल्लू मेरा यकीन कर, मै कमिया ही हूँ! तेरी कमिया जिसके लिए तूने दो सालों तक इंतज़ार किया, वही कमिया!” उस लड़की ने कहा, दिल्लू दुविधा में फंस गया बेचा...
नहीं डिग सकता! मै अपनी क्रिया में तत्पर रहूँगा! ऐसा सोच फिर से बैठ गया दिल्लू साधना में! मंत्र पढता रहा! मात्र पांच सौ तीन मंत्र रह गए थे! मात्र पांच ...
दिल्लू ने आसन बिछाया! शमशान-पूजन किया और फिर शमशान भोग दिया! आज त्रिशूल भी लाया था दिल्लू! उसके बाद उसने अलख उठायी और क्रिया आरम्भ की! दिल्लू ने सही उ...
फिर आई तीसरी रात! आज आसन को बिछाने का प्रयोग था! उसने आसन पूर्ण किया! और फिर बिछाने का कर्म आरम्भ किया! उसने अपने हाथ की हथेली को चाक़ू से काटा और रक्त...
होगी बाबा उसको सूचित कर देंगे! ये शमशान उन्ही के गाँव का एक शिवाना था, पीछे नहर बहती थी छोटी सी! और वो दिन भी आ गया! अब दिल्लू काम-काज छोड़ बाबा का भ...
“बेटा, जो मै कर सकता था कर लिया” बाबा ने कहा, ऐसा सुनके सर घूम गया दिल्लू का! ये तो मरते में दो लात और मार दीं ऐसा हुआ! “बाबा कोई और रास्ता बताओ?”...
इतना सुन दिल्लू का दिल डूबा! आँखों के सामने अँधेरा आ गया! मुंह खुला रह गया दिल्लू का! धडाम से गिरा अपने ख्यालों में ज़मीन पे! ये क्या सोचा और क्या हो ग...
तभी काम कर रही है तू” दिल्लू ने कहा, “हाँ दिल्लू, क्या करूँ, बेटा काम तो करना ही है” उसकी माँ बोली और गठरी दे दी दिल्लू को! दिल्लू ने गठरी उठायी और ...
लगता है कोई कमी रह गयी बाबा से, आज जाऊँगा तो बताऊंगा, कितनी आशाएं थीं मुझे आज की! आज कमिया कह देगी दिल की बात! और फिर मै भी कह दूंगा कि कमिया मै तो तु...
समय बीता, पंद्रह रोज गए लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा, वो सकते में तो आता परन्तु बाबा ने कहा है तो एक महीना तो रुकना ही पड़ेगा! वो सब्र का बाँध बांधे बैठा ...
अब दिल्लू के मन में खुशियों का अम्बार लगने वाला था! जो काम वो दो सालों में कर सका था वो अब एक महीने में हो जाने वाला था! ऐसा सोचते सोचते घर आ गया दिल्...
वापिस आया! फिर काम पर लग गया, पैसे बाप को दे दिए! फिर रात आई! फिर उलझ गया खयालों में दिल्लू अपनी चारपाई पर! कैसे कहे मन की बात? क्या कमिया समझेगी या...
उस रात! नींद नहीं आ रही थी दिल्लू को! अपने नीम के पेड़ के नीचे बिछी चारपाई पर करवटें बदल रहा था! वही कशमकश कि क्या किया जाए? कैसे कही जाए अपने दिल की ब...
