श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
Admin
Member
Joined: Apr 29, 2024
Last seen: May 12, 2026
Topics: 245 / Replies: 9254
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"कौन है ये बचाने वाला?'' बोला वो,"तुम नहीं जानते?" पूछा मैंने,"नहीं!" बोला वो,"क्यों?" पूछा मैंने,''अब नहीं!" बोला वो,"अब नहीं?" कहा मैंने,"हां!" बोला...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"अच्छा है आप मिल गए!" बोला वो,"किसलिए?" पूछा मैंने,"मेरे मन में अनेकों प्रश्न हैं!" बोला वो,"जितना सम्भव हो, उतना उत्तर दे सकता हूं, मात्र जाने अनुसार...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"तो उस समय मेरा कर्त्तव्य क्या बनता है?" बोला वो,"कर्तव्य?" कहा मैंने,"हां, यदि प्रायश्चित नहीं तो?" बोला वो,"कितनी हास्यास्पद सी टिप्पणी कर दी आपने भ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"सरल भाषा में तो यही हुआ!" कहा मैंने,"और गूढ़तम में?" पूछा उसने,"हत्या का अर्थ होता है, घटा देना!" कहा मैंने,"ओह!" बोला वो,"सुनिए!" कहा मैंने,"जी?" बोल...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

कुछ किताबें टटोलीं उसने, और फिर, रुक गयी, बाहर झांका, एक या दो पल, फिर से, किताबें जस की तस ही रखने लगी, जैसे पहले रखी थीं और रखने के बाद मेरे पास तक ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"उस मनीषि-पुत्र ने ऐसा तप किया कि जैसे समस्त दिशाओं की चूलें ही खिसक गयीं!" बोली वो,"क्या?" मैंने हैरानी हुई तो मैंने पूछा,"हां, ऐसा तप!" बोली वो,"ये ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"हां, अब बताइये!" बोली वो,"आपको तो पता ही होगा, मैं किसी और कार्य के लिए यहां आया हूं, यहां से बीस किलोमीटर उत्तर में जाना है, किसी का इंतज़ार के, वे आ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"ये हड़ुक आखिर है क्या?" पूछा मैंने,"ये सम्भवतः, कोई जनजाति या कोई विशेष सम्प्रदाय रहा होगा उस समय का!" बोला वो,"यही लगता है!" कहा मैंने,"अब या तो ये म...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"मैं समझ गया आपका आशय!" बोला वो,और फिर मैं भी चुप हो गया! आसपास देखा, अभी तक वो अदृश्य जल, मेरे विचारों में छलछला रहा था, मैं भूला नहीं था उसे!"हां, ब...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"और हां? बोला वो,"हां?" कहा मैंने,"ये विवेक क्या?" पूछा उसने,"चेतना का बल!" कहा मैंने,"बल?" बोला वो,"हां? बल?" कहा मैंने,"नहीं स्पष्ट हुआ!" बोला वो,"ब...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"भगवान का अर्थ क्या?'' पूछा मैंने,"मैं तो बोलने लायक ही न रहा!" बोला वो,"अरे? बताओ तो?" कहा मैंने,"मेरे लिए तो ईश्वर और भगवान, एक ही हैं!" बोला वो,"नह...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"ये संसर्ग, दीर्घकालीन एवं अचलित सा प्रतीत होता है!" कहा मैंने,"किस प्रकार?" बोला वो,"इस प्रकृति में जितनी भी सौम्य वस्तुएं हैं, करुणा हैं वे सब स्त्र...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"और चलो, मान लिया जाए, या फिर मैं इसे असम्भव के नज़दीक ही कहूं भी, तब भी ये ईश्वर रहा तो वही!" कहा मैंने,"हां!" बोला वो,"और फिर भी तो सुखेच्छा!" कहा मै...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"ये तो सत्य है!" बोला वो,"एक श्वास भी, विकरालता धारण करने में समर्थ है!" कहा मैंने,"अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न, आपसे जानना चाहूंगा!" बोला वो,"अवश्य!" बोल...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"और फिर वाष्प?" पूछा उसने,"बहुत सूक्ष्म प्रश्न है!" कहा मैंने,"उत्तर दें!" बोला वो,"बालचंद्र?" कहा मैंने,"जी?" बोला वो,"इस संसार को हम तीन लिंग से जान...

2 years ago
Page 608 / 634
error: Content is protected !!
Scroll to Top