श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"बालचंद्र?" कहा मैंने,"जी?" बोला वो,"ये इतनी बड़ी खोज होगी, यदि पूर्ण हुई तो, क्या इसके बारे में सरकार को अवगत नहीं करवाया गे?" पूछा मैंने,"आचार्य जी न...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"सत्य! सत्य!" बोला वो,"कुछ अंश हैं ये बालचंद्र!" कहा मैंने,"मेरे लिए तो मेघ से कम नहीं!" कहा उसने,"अच्छा है!" कहा मैंने,"आप कनखल आइये ज़रूर!" बोला वो,"...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"क्या क्या है न इस संसार में!" बोला वो,"हां!" कहा मैंने,"छिपा हुआ!" बोला वो,"नहीं तो?" कहा मैंने,"कहां है?" बोला वो,"सर्वत्र तो!" कहा मैंने,"तो दीखता ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"ऐसा न करिये!" बोला वो,"नहीं!" कहा मैंने,"दया!" बोला वो,"नहीं!" कहा मैंने,"कभी समय दें?" बोला वो,"नहीं!" कहा मैंने,"चर्चा हेतु?" बोला वो,"बस!" कहा मैं...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"तो ये बीता हुआ स्वयं क्या है बालचंद्र, कौन है?" पूछा मैंने,"कौन?" बोलै वो, हैरान था बहुत!"ये वही है जो दास था!" कहा मैंने,"ओह!" बोला वो,"वही दास, जो ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"और गंतव्य?'' बोला वो,"बालचंद्र!" कहा मैंने,"हां?" बोला वो,"इस गंतव्य पर पहुंचने के लिए एक बड़ा ही संकीर्ण सा मार्ग मिलेगा!" कहा मैंने,"संकीर्ण?" बोला ...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"क्यों बालचंद्र?" कहा मैंने,"जी!" बोलै वो,"ये आत्मा तो ईश्वर की बात भी काट देती है! उसकी भी सगी नहीं!" कहा मैंने,"आने लगा है समझ!" बोलै वो,"जो सगी हो,...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"कैसे कटेगा पाषाण?" बोला वो,"धारा से!" कहा मैंने,"कैसी धारा?" बोला वो,"प्रश्नों की!" कहा मैंने,"और पाषाण क्या?" बोला वो,"स्वयं!" कहा मैंने,"कोई अवरोध?...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"जिस प्रकार सागर, गहरा होने पर, पक्षी, ऊंचा उड़ते हुए भी नीचे देखता है, मवेशी, घास चरते हुए भी, मिट्टी नहीं खाता, ठीक उसी प्रकार एक उत्तम मनुष्य को प्र...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"तो निर्णय की तीन अवस्थाएं या प्रकार!" कहा मैंने,"समझ गया!" बोला वो,"ये तीनों ही चरण, एक साथ, समन्वय नहीं करते! कर पाना असम्भव ही है, परन्तु जो कर लेत...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

''बालचंद्र!" कहा मैंने,"जी?" बोला वो,"समस्त प्रश्न इस संसार तक ही सीमित हैं!" कहा मैंने,"हां!" बोला वो,"और कारण भी!" कहा मैंने,"हां!" बोला वो,"तो उनके...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"ध्यान! विपस्सना!" कहा मैंने,"हां, आजकल ये विपस्सना या विपश्यना बहुत ज़ोर पर है!" बोला वो!मैं मुस्कुरा पड़ा!"बताएं?" बोला वो,"क्या बीज से ये जाना जा सकत...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"ये ही विज्ञान है?" बोला वो,"हां, समस्त जगत एक विज्ञानं ही तो है!" कहा मैंने,"हां!" बोला वो,"ये सम्भाष, इसकी सक्षमता, संबवतः एक न एक दिन मनुष्य इसे भी...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

"तो क्या हो सकता है?" बोला वो,"उन्होंने भी सबसे पहला प्रश्न यही किया होगा!" कहा मैंने,"हां!" बोला वो,"बारह गए! इसका मतलब? उन्होंने दोबारा से सोचा!" कह...

2 years ago
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RE: वर्ष २००९, एक साधना, अक्षुण्ण भार्या वेणुला!

इस सिला को हमारे यहां, तंत्र में भी 'उप्पणी' या 'मुद्राखि' कहा जाता है, ये एक प्रकार की चुड़ैल ही होती है! कहीं पाठ ये सोचें कि इस्लाम से इसका कुछ लेना...

2 years ago
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