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"हाँ, अब बताइए?" बोली वो,"मृणा?" कहा मैंने,"जी?' बोली वो,"क्या ये सम्भव नहीं कि ये विषय में बाद में बताऊं?'' कहा मैंने,"जैसी आपकी इच्छा!" बोली वो,"तो ...
"जी!" बोली वो,"इसका रूप भीषण, मलिन, कार्ष्णेय-रूपी, श्याम-नील आभा युक्त होता है! इसके केश, सर के चुटीले से आरम्भ हो, नीचे तक आते हैं, केशों का रंग, धस...
उसके बाद, मयंक की रुलाई फूटी और बिस्तर पर ढेर हो गया! इस समय उस से कुछ कहना, न ही हितकर था और न ही शोभनीय, अतः हम बाहर चले आये! मेरा भी मन ठीक न था, म...
हम सभी चौकन्ने हो गए! अगला चरण जो भी था, वो काफी कठिन और क्लिष्ट होने वाला था, ये तो आभास था मुझे! अब क्लिष्ट तो कई साधनाएँ हैं, लेकिन ये कौन सी हो, इ...
"आओ साधिके!" कहा मैंने,"आदेश नाथ!" कहा उसने,"और हम, वो स्थान, छोड़ते, हमें उस सामान को इकठ्ठा करना था, आज की समस्त क्रिया समाप्त हो चुकी थी, अतः, आज बा...
मित्रगण! मैंने उसी रात उस गजिंदर को पेश किया, उसको एक और महाप्रेत कंटक के संग भेज दिया! कुछ ही पल लगे और ऋचा उस क़ैद से छूट गयी! मैं जानता था कि वो उस ...
नीमच! शायद बहुत ही कम लोग ये जानते होंगे कि नीमच का अर्थ होता क्या है! नीमच का अर्थ होता है, कुछ भी स्थिर नहीं रहने वाला! अर्थात यहां कुछ भी स्थिर नही...
अचानक की आग की चिंगारियां घूमने लगीं उधर! वे चिंगारियां ऐसी थीं, कि जैसे असंख्य चिताओं को एक-दूसरे पर रख, एक साथ ही, कोई सात या आठ मंजिला बनाकर, दाह क...
"ले गया?" कहा मैंने,"हां! मैं ले गया!" बोला वो,"क्यों ले गया?" पूछा मैंने,"मुझे बहुत अच्छी लगी वो औरत!" बोला वो,"लगी या लगती है?" पूछा मैंने,"लगती है!...
अब मेरी साधिका ने कमान सम्भाल ली थी! वो आगे बढ़ती जा रही थी! मुझे तो भान था कि आगे होना क्या है! बस देखना था तो ये, कि ये चतुर्थ एवं अंतिम घटी कैसे गुज...
हमने रास्ते से सामान ले लिया! और चल पड़े अपने स्थान के लिए! यहां से मुझे अब रवाना करना था अपना शाहबाज़ खिलाड़ी इबु! इबु का तब मैंने बहुत दिनों के बाद किस...
"नाथ?" बोली वो,"चुप्प? बता आगे?" कहा मैंने,"हाँ, हाँ नाथ!" बोली वो,"बता?" कहा मैंने,"वो शिशु, खा रहा है उस टुकड़े को!" बोली वो,"और उसकी देह?" पूछा मैंन...
मैंने देखा कि उस चादर के नीचे जो भी था, वो जब यहां होता था तब वो घुटने मोड़ कर रखता था, और जब नीचे होता था, तो पांव सीधे रखता था! इसका क्या मतलब था? और...
"और वो वृद्धा साधिके?" पूछा मैंने,"वो, नाथ! नाथ!" बोली वो, बिन पूरी बात किये!"हाँ, बताओ साधिके?'' पूछा मैंने,"योनि से कुछ बाहर आने को है?" बोली वो,"क्...
"बताओ मयंक?" पूछा मैंने,उसने सोचा थोड़ा, और फिर मुझे देखा,"हां" बोला वो,"क्या कहा उसने?" पूछा मैंने,"कुछ नहीं!" बोला वो,"कोई और भी है साथ?" पूछा मैंने,...
