Last seen: May 11, 2026
"ओ देख?" चीखा मैं,"आकाश नाथ?" बोली वो,"हे? ओ र** ** ***! ओ! ओ देख?" कहा मैंने, फिर से चीख कर!"नहीं नाथ! क्षमा...." बोली वो,"ओ! उस माद** इंद्र की साली!...
उधर, दिन ढले, वो लड़का अपने घर जा पहुंचा! रात हुई और उसको अपने उन दोस्तों की कोई खबर नहीं लगी! सोचा, ले आये होंगे माल, अब तक तो कहीं दूर ही जाकर, मजे र...
तो जैसे ही वो नीचे बैठी, कि फर्र की सी आवाज़ गूँज उठी उस वृक्ष से! जैसे पूरा का पूरा वो वृक्ष किसी तीव्र विद्युतीय-आवेश में आ बिंधा हो! बस चिंगारियां न...
"सोचो?" बोला वो,"क्या?" बोला दूसरा,"वो पागल ये क्यों कहने आयी, रख दो?" बोला वो,''अबे कहीं जी तो नहीं लगा गया उसे कल्लो से?" बोला वो, हंसते हुए!"नहीं, ...
"अन्धो माँ! अन्धो माँ!" आवाज़ें कई, गूंज उठीं!"ओ पागल? कोई और भी है तेरे साथ?'' बोला दूसरे वाला,"सब हैं" बोली वो,"कौन?" पूछा उसने,"आजक!" बोली वो,"और ये...
अब तो चारों लग गए जी जान से! सोना मिला था, अब भले ही सिक्का सही! वो दरअसल में, एक गिन्नी थी, करीब चार ग्राम की रही होगी! अब गिन्नी मिले, सामने एक जगह ...
मारे भय के अब तो हत्थू के भी हाथ-पांव फूले! उसे याद आ गया था सुज्जन! ये तो करीब दस साल पहले की बात थी! सुज्जन का धन ले लिया था इस हत्थू ने, और उस को,...
तो वे लोग, गांव से बाहर आ गए! और जब बाहर आये तो एक पुराना मंदिर पड़ा, मंदिर तो खैर क्या था, खंडहर सा ही था, कोई आयोजन हुआ तो दीप लगया दिया, न हुआ तो दि...
तो उसी रात से कालू ने कच्चा-हाड़ ढूंढना शुरू कर दिया! अपने चेले चपाटों को लगा दिया था काम पर, जहां से भी मिल जाए ले लो बस! और खुद भी लग गया ढूंढने में!...
"इसका मतलब ज़ोर बहुत है उसका!" बोला बाबा,"हां, बहुत!" बोला वो,"तेरे घेरे तो गए?'' बोला वो,"सब छूट गए" बोला वो,"समझ गया!" बोला वो,"बताओ?" बोला वो,"कोई ह...
"जा लौट जा!" बोला छपना!"हे? कौन?" चीखा कालू!"लौट जा!" बोला फिर से,"बता?" बोला वो,"जा! लौट जा!" बोला वो,"ज़ोर-जमाला?" बोला वो,एक चीख गूंजी! और वो गीता ध...
रख दिए उसने, एक जगह वो दोनों ही कपाल कटोरे! और देखा मुझे!"हट जा वहां से!" कहा मैंने हाथ के इशारे से!और दौड़ती हुई मेरी पास चली आई!"औंधिया! ओ रं*!! जा, ...
तो शाम को छपना आ गया गीता को ले कर! गीता आ गयी थी, गीता का मर्द कुछ करता-कराता था नहीं, दिन भर दारु पीना और ज़रायमपेशा लोगों के साथ उठना-बैठना! तो गीता...
और फिर अगला दिन आया! आज जाने क्या हो इस कालू का! धन के लालच ने तो उसको ऐसा जकड़ा कि ज़ोर-जमाल के बहकावे में आ गया! बहकावा! हां, अब स्वयं सोचिये, ऐसी कौन...
"उठो साधिके!" कहा मैंने, उठते हुए!वो उठा और मैं भी उठ गया! चला, ज़रा पास में ही, और अपने झोले से मैंने, एक छोटा सा थैला निकाल लिया! उसको लेकर आया! और ठ...
