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जब हम वहां के लिए आधे रास्ते में पहुंचे, तो एक स्त्री मिली, उसे पता था कि हम जा कहाँ रहे हैं तो मदद की उसने, और ठीक ठीक रास्ता बता दिया! हम उस पर चलते...
तो बीयर्स भी आ गयी थीं! दो तरह की थी, एक गुरु और एक हेवर्ड्स १००००, गुरु में मिक्सचर होता है, एक्स्ट्रा-अल्कोहल का, स्वाद में भी कड़वी होती है, तो मैंन...
करीब दस मिनट में वो लौटी! हाथ में एक थैली थी, आई और मुझे देख मुस्कुराई वो! मैं भी मुस्कुराया उसे देख!"मिल गया?" पूछा मैंने,"हाँ, ले आई!" बोली वो,"भूल ...
और इस प्रकार हम वापिस हो लिए! बद्री ने कुछ पूछा तो उसे भी उसको समझ आने वाली बात ही समझा दी! प्रधान को जो पूछना था बता दिया गया था! अब रही बात शाम को य...
हम भी उठ खड़े हुए! और चले बाहर की तरफ! आज की क्रिया अंतिम थी, अतः आज तो कोई कसर बाकी न रहनी थी! आज उपाक्ष-भैरवी का आह्वान था, इसके पश्चात, ढाई वर्षों क...
"शहरयार?" कहा मैंने,"जी?" बोले वो,"कुछ देखते हो?" कहा मैंने,"यहां तो सब बराबर है यहां!" बोले वो,"नहीं!" कहा मैंने,"क्या विशेष है?'' बोले वो,"सामने देख...
बड़ी ही अच्छी सी जगह, साफ़-सुथरी सी जगह पर ये स्थल बना था, अधिक बड़ा तो नहीं था, लेकिन था बेहद ही बढ़िया! गुलमोहर और जामुन के पेड़ लगे थे यहां, जामुन के पे...
"फिर कभी बताऊं?'' बोली वो,"हाँ, ज़रूर!" कहा मैंने,उसने चाय डाल दी थी, चाय का गिलास मुझे थमाया, मैंने पकड़ा और भरा एक हल्का सा घूंट! गन्ने के रस में और उ...
कलुष नहीं चला! ये तो आनंद का विषय था! ये स्थान तो मेरी कल्पना से भी अधिक शक्तिशाली था! जहां मुझे भयभीत होना चाहिए थे वहीं मैं आनंदित हुआ! मित्रगण! ये ...
"उठो? उठो साधिके?" कहा मैंने, हिलाते हुए उसे!काफी देर तक, हिलाने-डुलाने के बाद, उसकी देह में सांस लौट आई! उसने आँखें खोलीं, मींचीं और स्थिति का भान कि...
एक बात थी, उमस नहीं थी यहां, और कोई कूड़ा-करकट भी नहीं! पेड़ अच्छे खासे लम्बे थे, जंगली पेड़, कीकर तो बहुतायत से थी वहां! कुछ अंग्रेजी कीकर और कुछ देसी ...
"हे बलधर! दया!" कहा मैंने,और मेरी साधिका ने भी यही दोहराया!"शाष! दया!" कहा मैंने,साधिका ने भी यही कहा!अचानक से एक प्रबल सा स्वर गूंजा! जैसे, पर्वत ने ...
"सो तो है ही! इसीलिए तो मरते हैं!" कहा मैंने,"नया ज़माना है! लोग तब तक यक़ीन नहीं करते जब तक सर पर ही न पड़े उनके!" बोले वो,मैंने अपना गिलास ख़तम किया, ग्...
हर दिशा से, खड़ताल से बज उठे! दुदुम्भी के नाद से टकराने लगे! लगा, अवश्य ही कोई भीमभट्ट सा योद्धा. रण-क्षेत्र में उतरने को आतुर हो! हर दिशा से, वायु-वेग...
"ठीक समझ गया! अच्छा, कल वो जगह दिखा दोगे?" पूछा मैंने,"हां जी!" बोला वो,"तो कल दस बजे?" बोला मैं,"दस तो नहीं जी, कल पट्टी खुलेगी, बारह बजे?" बोला वो,"...
