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उठा तावक नाथ!उठायी भस्म! और फेंक मारी भस्म उन पर!नेहुक्ष लौट आई! लेकिन उन तीनों साध्वियों के मुंह और योनियों से, गाढ़ा पीला द्रव्य बाहर आ गया था! मैं च...
अब मैंने फिर से देख लड़ाई!ये क्या कर रहा था वो तावक नाथ?इतनी शीघ्र ही नियम भंग?उसने अपनी एक साध्वी को नीचे लिटा दिया था,और उसके ऊपर चढ़ बैठा था, उसकी कम...
घुटनों पर बैठा!और मंत्र पढ़ा उस छायाकि का!भन्न से प्रकाश कौंधा!कुछ धूम्र की आकृतियाँ, चक्कर लगाने लगीं!अब मैंने अलखनाद किया!रोड़का-नाद किया!और वो धुआं!स...
और कोई दस मिनट के बाद!मेरे यहां पर मुंड गिरने लगे!चारों ओर! हर तरफ, एक से एक टकराता और उछल जाता!कोई लुढ़कता हुआ,हमारी ओर भी आ पड़ता!मैं लात से फेंक देता...
तिमिरा!तिमिरा! क्या चुना था उसने भी!कोई छोटी-मोटी शक्ति नहीं! लुहांगी की सह-सहोदरी! और ये दोनों भी एक महाशक्ति की सहोदरी हैं! असम में कई स्थानों पर पू...
"अभी भी समय है! क्षमा मांग ले!" कहा मैंने,थू! थूका उसने, और दिया अलख में भोग! वो नहीं बाज आने वाला था! पूरा डूबा था खण्डार के दम्भ में!अब वो दोनों औघड़...
उसने कपाल उठाया, और किया आगे!जता रहा था की, मेरा भी हाल ऐसा ही होगा!फिर मारी दहाड़! और सभी हँसे! वो साध्वियां भी!मूर्खों की मड़ंली लगी थी!और तावक नाथ, उ...
लोप हो, हुई मुस्तैद!मैंने ब्रह्म-कपाल रखा सम्मुख!बाल-कपाल टांगा त्रिशूल पर!अब लड़ाई देख!वाचाल की देख!त्रिशूल लिया,उसको माथे से लगाया,और कर दिया उत्तर क...
रक्त से, चिन्ह बनाये उसके शरीर पर,कमर पर, स्त्री-चक्र बनाया, और शक्ति-यंत्र स्थापित किया,नाभि पर, अष्ट-चक्र बनाया!"लेट जाओ" कहा मैंने,वो लेट गयी, तब म...
वो आ गयी पास मेरे!"बैठो!" कहा मैंने,बैठ गयी!"जैसा मैं कहूँ, वैसा ही करोगी?" पूछा मैंने,"हाँ" बोली वो, अनुभव क्र,९२ भाग ४"मन में भय तो नहीं?" पूछा मै...
आज अमावस थी!निर्णय की रात!उस दिन मेरा मौन-व्रत था! बस मन्त्र कंठस्थ करने थे!वही किया मैंने सारा दिन, भोजन निषिद्ध होता है, अतः नहीं किया,और फिर हुई शा...
पहुंचे अपने यहां,सामान रखवाया सारा,और मुझे ले चली अपने कक्ष में चारु!"कितना प्यारा मौसम है!" बोली वो,"हाँ! है तो!" कहा मैंने,"मैं नहा लूँ इसमें?" पूछा...
देखा मुझे, नज़रों में कई सवाल थे, लेकिन मैं, अभी,इनमे पड़ना नहीं चाहता था!"दरवाज़ा बंद कर लो!" कहा मैंने,और मैं मुड़ने लगा,तभी पकड़ लिया उसने!"क्या हुआ?" प...
मैं आगे गया, पाँव पटका, और उसने छलांग लगाई!"आओ!" कहा मैंने,और हम चले फिर वापिस!आ गए वापिस वहीँ,थोड़ी देर बाद ही, भोजन लग गया, शर्मा जी को वहीँ बुला लिय...
हमने, इसीलिए हम चार लड़कियां साथ सोया करती थीं" बोली वो,"हरामज़ादे कहीं के!" कहा मैंने,"तावक नाथ की एक साध्वी आती थी संग उसके, नाम है, मिहिरा, बहुत बदसल...
