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नग्न-देह,केशों में लिपटी हुई,अस्थियों के आभूषण धारण किया करती है!सिद्ध होने पर, साधक को सर्वस्व प्रदान किया करती है!मैं लगा हुआ था आह्वान में,कोई दस म...
वो औघड़ वहाँ,हवा में उछला!चीखें मारता हुआ, पेट फूला,और गुदा मार्ग से रक्त बहाने लगा!खून से लथपथ हो गया वो, चीखें मारे! चिल्लाये!इधर उधर भागे, उस तावक न...
मैं समझ गया उसी क्षण!भागा मैं, साध्वी की ओर!किया उसको खड़ा, और किया अपने आगे,पीछे से, उसकी कमर में हाथ डाल दिया!अगले ही क्षण,मिटटी उठने लगी!धूलम-धाल हो...
चपड़ चपड़ सब चाट गया!"ले! और ले!" कहा मैंने,वो और चाट गया!और फिर, एक ज़ोरदार अट्ठहास!ढप्प की आवाज़ आई पीछे,वो पीछे जा बैठा था, दूर अँधेरे में,जहां बैठता ह...
भरमाते हैं, एक चूक और इहलीला समाप्त!शरीर के टुकड़े टुकड़े हो, बिखर जाएंगे हर तरफ!खैर,मैंने नेत्र खोले अपने,और अलख में, संपुष्ट भोग अर्पित किया!चरक-चरक क...
और अपनी गोद में रखा उसे,मंत्र पढ़े,और उठाया उस कपाल को, किया कुछ वार्तालाप!भन्न भन्न की सी आवाज़ें आने लगीं तत्क्षण ही!और मेरे यहां!मैं जुटा हुआ था आह्व...
चौबीस बलि-कर्म द्वारा पूज्य है!पांच, संसर्ग-क्रिया हैं इस साधना में,साधिका मात्र एक ही होनी चाहिए,रात्रि काल, एक बजे के बाद, इसकी साधना आरम्भ होती है,...
महाक्लिष्ट साधना है इसकी!रुमुकि कहा जाता है इसको!कहीं कहीं, ग्राम-देवी के रूप में पूज्नीय है!दक्षिण भारत में, एक विशिष्ट देवी है!कश्मीर में, एक अन्य न...
और मैं! हँसू उसकी इस अवस्था पर!गाल बजाऊं!जांघें पीटूं!खिलखिलाकर हँसू!"तावक?" चीखा मैं,देखा उसने,"तेरा इस से भी बुरा हाल करूंगा! ****!!" कहा मैंने,"***...
उम्भाक से मेरी साध्वी की अस्थियां चूर्ण करना चाहता था!मेरे ऊपर बस नहीं, तो मेरी साध्वी पर वार!मित्रगण!और तभी मेरे आसपास, धुंआ उठने लगा,ये उम्भाकि-धूम्...
औघड़-मद चढ़ने को था!हुआ अभय-मुद्रा में खड़ा!किया घुटना आगे,लिया त्रिसूल,कीं आँखें चौड़ी,लहराया त्रिशूल,"तावक?" चिल्ला के बोला मैं,वहाँ,वे सभी चौंक पड़े!ताव...
जैसे सब बहा ले जायेगा!और उसी समय!घंटा बजा!वे सारे महापिशाच स्थिर हो गए,सर झुका लिए!वृहदकुण्डा प्रकट हो गयी!वो जल का भंडार, लोप हो गया!और लोप होने से प...
मैं मंत्रोच्चार में लीन था,लेकिन, अपना त्रिशूल उठाया मैंने,और रखा चारु की टांगों पर!वो नीचे बैठी, वो कन्या,और किये दोनों हाथ आगे, जैसे, कुछ मांग रही ह...
वर्ण में भक्क काली और दुर्गन्ध वाली होती है!मांस-प्रिय होती है!श्वास में भीषण दुर्गन्ध निकलने लगती है साधक के,साधना काल में भी!पूरे साधना-काल में, ज्व...
ये चबूतरा, एक ही रात में बनना आवश्यक है!उसके बाद, रक्त-स्नान द्वारा स्वच्छ होता है!रीछ के चर्म से बने आसन का प्रयोग होता है,शिशु-नाल से माल बनाया जाता...
