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उसी शाम मैं गया रिपुना के पास, और उसको सबकुछ बताया, समझाया, ये ही कि अब न तो अफ़सोस मनाने का ही समय है और न ही किसी मध्यम-मार्ग को ढूंढने का! बस, वो कल...
मैं आगे तक गया, अलख तक, प्रणाम किया और अपना अंतःवस्त्र पहन लिया, उस साधिका के भी वस्त्र उठा लिए, तब तक साधिका, उठ कर, मेरे पास आ चुकी थी! मैंने उसको उ...
फ़ोन कटा और रख दिया मैंने! शर्मा जी भी आ गए थे बाहर गुसलखाने से!"किसका फ़ोन था?'' पूछा उन्होंने,"उसी, नेतू का!" कहा मैंने,"क्या बक रहा था?' पूछा उन्होंन...
मैं पल भर को नहीं, पूर्णतया विस्मित था, ये क्रिया, ये समय, ये दशा और ये सब? इसके बाद भी कोई ऐसा प्रश्न था क्या? और ये मुक्ति? मुक्ति से क्या अर्थ? बिन...
वापसी में, रिपुना को उसकी जगह छोड़ा, खूब समझाना पड़ा उसे! उसके दिमाग की सुइयां बार बार एक ही जगह आ कर जाम हो जाती थीं, तो गरारियों में ज़रा सी जुम्बिश की...
मैं एकादश पर पहुंचा और हैरत हुई मुझे! मैं उसके स्खलन की प्रतीक्षा में था, उसे अभी तक स्खलित हो जाना चाहिए थे! परन्तु नहीं! अब क्या किया जाए? जितना जान...
"मुझे नहीं पता!" बोली वो,"क्या बात है? आज तुनकमिजाजी ज़्यादा है कुछ?" कहा मैंने,"आपसे मतलब?" बोली वो,"अरे? फिर किस से मतलब?" पूछा मैंने,''आप करो ऐश!" ब...
"कोई आया?" पूछा मैंने,"नहीं नाथ!" बोली वो,"क्या महसूस कर रही हो?" पूछा मैंने,"यहां शान्ति है बहुत!" बोली वो,"हाँ!" कहा मैंने,"परन्तु?" बोली वो,"क्या?"...
एक जगह आई! वहां रुक गया बिसन! यहां एकांत था, और शान्ति भी थी! यहां पूजन होता था, ये भी पता चलता था! धूनी रमाई जाती थी, ये भी पता चलता था! कुल मिलाकर, ...
कूप-मण्डिका, ये एक प्रभावी महाशक्ति है तन्त्र-जगत में! श्लोमा नाम से जानी जाती है! रूप में कामुक-मादक, व स्व-नित्र रूप धरा करती है, अर्थात, जिस रूप मे...
कुछ देर रुके रहे हम, सोचा शायद कोई और भी आ रहा होगा, जो मदद कर रहा हो!"कोई आ रहा है क्या?'' पूछा मैंने,"हाँ जी!" बोला वो,"कौन भला?" पूछा मैंने,"गाड़ी!"...
तो हम जगह बनाते हुए डेरे में गए! आज बड़ी ही भीड़ सी थी यहां भी! न जाने क्या उपलक्ष्य था, और यदि होता तो शायद, बलदेव हमें बताता तो ज़रूर! कुछ लोग साजो-साम...
"चल जा! अभी तेरा वक़्त नहीं!" कहा मैंने,"न! रे!" बोली वो,"ना! जा!" कहा मैंने,"न न रे!" कहा उसने,"सुन, अभी जा, फिर सही!" कहा मैंने,"वचन?" बोली वो,"हाँ!"...
भोजन भी कर लिया! भोजन बड़ा ही स्वादिष्ट था! दाल-भात, सब्जी, अचार, दही और सलाद! यूँ समझिए कि जम कर खाया हमने! घर जैसा ही स्वाद लगा! डेरे की महिलाओं ने ह...
"साधिके?'' कहा मैंने,"जी, नाथ?" बोली वो,"कूप में जाना होगा!" बोला मैं,"जी!" कहा उसने,"उद्देश्य ज्ञात है?'' पूछा मैंने,"जी!" बोली वो,"मदिरा परोसो!" कहा...
