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अब वो उठा और चला गया! इसके बाद मैं और शर्मा जी आराम करने के लिए लेट गये! रात हुई, रात को फिर से खाना-पीना हुआ और हमने आगे की रणनीति बनायी, क्या ...
लहना से जो जानना था सो जान लिया था, हाँ, ये नहीं पता था कि वो हमारी बात समझ चुका है या नहीं! खैर, इसका पता भी चल ही जाना था, अब अगला मुक़ाम था हमारा उस...
जीवेश ने छोड़ दिया! “सुन अगर तूने उस सोमेश को खबर की, तो साले तू कहीं भी छिप जाइयो, तेरी माँ ** ** फाड़कर भी बाहर निकाल लूँगा तुझे!” जीवेश ने कहा! ब...
चुप हो गया! “इस सोमश को पता है?” मैंने पूछा, चुप! “बता?” मैंने पूछा, “हाँ, पता होगा” वो बोला, “अब तू हमारी कैसे मदद करेगा?” जीवेश ने पूछा, ...
उसने ज़ोर लगाया दिमाग पर! “कितने दिन हुए?” उसने पूछा, “हरामज़ादे एक साल हो गया पूरा!” वे बोले, अब बाबा ऐसे काँप रहा था जैसे ठंड में ठिठुरता कोई कु...
चेलों ने उठाया उसका, उसने अपनी नाक और मुंह साफ़ किये, हांफ रहा था तेज तेज! बदहवास सा! “साले बचा लिया, नहीं तो यहीं जान दे देता अपनी!” जीवेश ने कहा, ...
“सच कह रहा हूँ, नहीं है फ़ोन” उसने कहा, उसके आदमियों की सिट्टी-पिट्टी गुम! कौन आ गए यहाँ! क्या होगा आज यहाँ? “और वो लड़की कहाँ है?” शर्मा जी ने पूछा...
अब घबराया बाबा! “साले कुत्ते को बुला यहाँ? ये न समझियो कि हम अकेले हैं यहाँ, चौरंग नाथ का सारा डेरा यहीं आ जाएगा अभी, एक ही आवाज़ में, समझा?” जीवेश न...
“वही वही!” जीवेश ने कहा, “हाँ, क्या काम है उस से?” उसने पूछा, “उसी से काम है, ज़रा मिलना है उस से” जीवेश ने कहा, “काम तो बताओ?” उसने पूछा, “आप ...
“आओ मेरे साथ” वो बोला, अब हम चले! वो हमको घुमाता-फिराता एक जगह ले गया, यहाँ कुछ गाय बंधी थीं और वहाँ एक दाढ़ी-मूंछों वाला व्यक्ति बैठा था, दाढ़ी-मूं...
लहना बाबा से मिलना है!” जीवेश ने कहा, “कहाँ से आये हो?” उसने पूछा, “सारी बात यहीं पूछ लेगा?” जीवेश ने गुस्से से कहा, “कहाँ से आये हो?” उसने पूछा...
ही एक खोमचे से पूछताछ की, तो पता चल गया, कुछ निशानी थी मेरे पास, उसी के सहारे आगे बढ़ रहे थे हम! यहाँ से हम पैदल पैदल चल पड़े, आसपास से गुजरते लोग हम ...
“हाँ!” मैंने कहा, महफ़िल बढ़ चली आगे! “जीवेश, वहाँ बाबा चौरंग के मित्र हैं, उनसे भी मिल लेंगे” मैंने कहा, “हाँ, ज़रूर!” वे बोले, और हम खाते पीते ...
बाबा चौरंग के एक मित्र का डेरा भी था! ये सबसे बढ़िया बात थी! अब लगता था कि ऊपर से मदद आ रही है और कड़ियाँ अब जुड़ने लगी हैं! बस अब देर थी तो बस उस जगह जा...
“यही करूँगा” मैंने कहा, मित्रगण! सार दिवस ऐसे ही काटा! संध्या हुई तो मैं क्रिया-स्थल गया, जीवेश ने समस्त प्रबंध करा दिया था! मैं क्रिया-स्थल में स...
