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“शर्मा जी, हिलना नहीं!” मैंने कहा, वे समझ गए! “कौन हो तुम दोनों?” मैंने पूछा, और तब एक औरत ने कुछ कहा, मुझे समझ नहीं आया कि क्या कहा उसने, बस एक...
खेल अब खूनी हो चला था! “सामने आओ मेरे?” मैंने कहा, कुछ पल गहन शान्ति! केवल झींगुरों की ही आवाज़, मंझीरे जैसे डर गए थे! “सामने क्यों नहीं आते?” मै...
“कौन है?” मैंने कहा, “कोई उत्तर नहीं! मै भाग के उसके पास गया और उसका हाथ जैसे ही पकड़ा उसने मुझे उसी हाथ से धक्का दिया और मै पीछे गिर पड़ा! मेरी कमर...
पास आया, पानी मंगवाया और आँखें साफ़ कीं, साफ़ होते ही राहत हुई! नथुनों में भी मिट्टी भर गयी थी, वो भी साफ़ की! मिट्टी किसने फेंकी? यही प्रश्न अब मेरे...
सवा दस बजे हम उसी ज़मीन के पास खड़े थे, वातावरण में भयावह शान्ति पसरी थी! कोने कोने में सन्नाटे के गुबार छाये थे! दूर कहीं कहीं सरकारी खम्भों पर लटके बल...
थोड़ी देर में चाय आ गयी, हम चाय पीने लगे, हरि साहब गुना शहर के बारे में बातें करने लगे, कुछ इतिहास और कुछ राजनीति की बातें आदि, चाय समाप्त हुई तो मैंने...
“आप बैग में से वही सामान निकाल लीजिये, जांच वाला” मैंने कहा, “जी, अभी निकालता हूँ” वे बोले, उन्होंने पास में रखा बैग खिसकाया और उसको खोला, फिर कुछ...
हम उसके पीछे चल पड़े! “ये है जी वो पेड़” शंकर ने इशारा करके बताया, ये पेड़ अमलतास का था, काफी बड़ा पेड़ था वो! मै वहीँ उसके नीचे खड़ा हो गया! कुछ महसू...
तभी शंकर का लड़का आया वहाँ भाग भाग और शंकर से कुछ कहा, शंकर हमको लेकर फिर से अपनी कमरे पर आ गया, वहाँ दूध का प्रबन्ध कर दिया गया था, हमने दूध लिया, बहु...
“कुछ और? कोई विशेष बात?” मैंने पूछा, “हाँ जी” वो बोला, “क्या?” मैंने पूछा, “यहाँ ऐसी चार पांच जगह हैं जहां पानी नहीं ठहरता, कितना ही पानी दे दो,...
“और गुरु जी, मेरी पत्नी ने भी कुछ देखा है यहाँ” वो बोला, “क्या?” मैंने उत्सुकता से पूछा, अब उसकी पत्नी की तरफ हमारी नज़रें गढ़ गयीं, “क्या देखा आप...
“जी पक्का पता नहीं, होगी ३०-३५ बरस” वो बोला, “क्या पहन रखा है उन्होंने?” मैंने पूछा, “कुछ नहीं” वो बोला, “कुछ नहीं? मतलब नग्न?” मैंने पूछा, “ह...
तभी सामने तीन पक्के कमरे बने दिखाई दिए, उसके पीछे भी शायद कमरे बने थे, वहाँ मजदूरों की भैंस और बकरियां बंधी थीं, चारपाई भी पड़ी थीं, उनके बालक वहीँ खेल...
हाँ, लगवा लीजिये” मैंने कहा, वे उठ कर बाहर गए और थोड़ी देर बाद उनका नौकर नाश्ता लेकर आ गया, हम नाश्ता करने लगे! “नाश्ते के बाद चलते हैं खेतों पर” म...
“ये सही रहेगा गुरु जी!” क़य्यूम भाई ने कहा, “वैसे क्या हो सकता है? कोई कह रहा था कि यहाँ कोई शाप वगैरह है!” वे बोले, “शाप! देखते हैं!” मैंने कहा, ...
