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और तभी जैसे ध्वनि-रहित दामिनी कड़की और मै उसके तमरूपी प्रकाश से सराबोर हो गया! एक अनुपम, दिव्यसुन्दरी प्रकट हुई! मेरे माथे पर शिकन उभरीं अब! ये कैसी ...
“लीजिये!” वे बोलीं, मेरी तरफ लोटा करते हुए! पात्र में केसर के रंग से मिला दूध था! मै उसको दिव्य दूध ही कहूँगा! “लीजिये?” वे बोलीं! “नहीं!” मैंने क...
“भेरू! जाओ, जाकर बुलाओ अपने नौमना बाबा को!” मैंने चुनौती दी उसको! नौमना बाबा का नाम सुनकर भड़क गया वो! अनाप-शनाप बोलने लगा, जिग्साल-साधना के अंश पढने...
“लड़के??” भेरू गरज के बोला मैंने उसको देखा! “क्या समझता है तू?” उसने कहा, “कुछ भी नहीं!” मैंने कहा, “चला जा! अभी भी समय है” उसने हाथ के इशारे स...
“बस भेरू?” मैंने चिढाया उसे! “देखता जा!” उसने कहा उसने ऐसा कहा और मैंने विमोचिनी माया का जाप किया! सर्प मोम समान हो गए! विमोचिनी यक्षिणी-प्रदत्त म...
उसने फिर से अट्टहास किया! “जा चला जा लड़के!” उसने कहा, “नहीं भेरू!” मैंने कहा, “नहीं मानता?” उसने फिर से धमकाया! “नहीं!” मैंने कहा, “ठहर जा फ...
उसने फिर से अट्टहास किया! “जा, अभी भी समय शेष है” उसने समझाया, “नहीं भेरू!” मैंने कहा, एक पल को अभेद्य शान्ति! “नहीं भेरू!” मैंने कहा, “...
और तभी, तभी एक महाप्रेत सा प्रकट हुआ! मैंने उसको ध्यान से देखा, कद करीब सात फीट! गले में सर्प धारण किये हुए, मुझे एकदम से हरि साहब की पत्नी क ध्यान आय...
सफलता प्राप्त करें गुरु जी” वे बोले, “अवश्य” मैंने कहा, “मै चलता हूँ” वे चलने लगे वहाँ से, “ठीक है, मुझे दूर से नज़र में ही रखना, किसी को यहाँ नह...
शर्मा जी भी लेट गए अपने बिस्तर पर, “आज मै आपको अपने साथ नहीं बिठाऊंगा, हाँ मुझे नज़र में ही रखना” मैंने कहा, “अवश्य गुरु जी” वे बोले, हम बातें कर...
वापिस आ गया, और कमरे से बाहर निकला, हरि साहब और शर्मा जी से नमस्कार हुई और फिर वहाँ बिछी एक कुर्सी पर मै बैठ गया, सामने पड़ा अखबार उठाया, चित्र आदि का ...
और फिर मेरे देखते ही देखते शाकुण्ड बाबा भूमि में समा गए! मै बैठ गया आसन पर! चौदस कल थी! पंचांग के हिसाब से दिन में ५ बज कर १३ मिनट से आरम्भ था उसक...
मैंने उसको अपना और अपने दादा श्री का परिचय दे दिया! “क्या करने आया है यहाँ?” उसने पूछा, “मुक्त! कुक्त करने आया हूँ!” मैंने कह ही दिया! “किसे?” उ...
“कौन है तू?” वो दहाड़ा! “जा! भेरू को बुला!” मैंने कहा, “उत्तर दे, कौन है तू?” उसने कहा, “जा, भेज उसे!” मै भी गरजा! “क्यों मरने चला आया है यहाँ?...
स्थान पर चला गया, हाँ बुहारी ले ली थी मैंने शंकर से, मैंने एक पेड़ के नीचे एक जगह बुहारी लगाई, जगह साफ़ की, और फिर अपना बैग रख दिया, एक एक करके मैंने सा...
