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"हाँ, उसी की प्रतीक्षा है" मैंने कहा, "हाँ वो तीसरे प्रहर में ही आएगा!" उसने बताया, "तीसरे प्रहर में ही क्यों?" मैंने पूछा, "वो उस से पहले मुल्त...
"तभी तो जीवित हो तुम!" वो बोली, "गोरख-टिल्ले का प्रबल औघड़! कोई सानी नहीं इसका!" उसने बताया, ये जानकर एक बार को मेरे पाँव के तलुओं में पसीना आ गया...
इसका व्यवहार अच्छा था! समझदार था! उसने आर-वार कुछ नहीं किया था! इसीलिए मैंने उसके हाथ जोड़े थे! "अब वापिस चला जा, हम यहीं बसते हैं, यहीं बसते रहेंगे...
"मै तुझे नहीं रख सकता!" मैंने कहा, "रखना पड़ेगा!" उसने कहा, "नहीं, नहीं रख सकता" मैंने कहा, वो खिलखिलाकर हंसी! उसने मेरा हाथ थामा, मेरे इर्द-गिर...
"तीन हारे, अर्थात बारह पीछे हटे!" उसने बताया, "तेरा अर्थ अभी पंद्रह और हैं?" मैंने पूछा, "सोलह!" उसने कहा, "सोलह?" मैंने अचरज से पूछा, "हाँ, ब...
"जा भाग यहाँ से! और भेज उस हरामज़ादे शम्स बाबा को, मै तुम्हारे काबू में आने वाला नहीं!" मैंने कहा, तब तुफ़ंग ने मंत्र पढ़ा! और एक मृत्यु-दायिनी वाहिन...
"क्या बात करनी है?" उसने पूछा, "पूछना है, की उन छह लोगों को क्यों मारा उसने!" मैंने कहा, "तू कौन होता है पूछने वाला?" वो बोला, "और तू कौन होता ह...
"बाबा शम्स ने!" उसने बताया, "बाबा शम्स?" मैंने पूछा हैरत से! "हाँ बाबा शम्स!" उसने कहा, "ये कौन है?" मैंने पूछा, "मुल्तान का बेजोड़ औघड़!" उसन...
"नहीं बाला अभी नहीं" मैंने कहा, "कब?" उसने पूछा, "डार से निबटने के बाद" मैंने कहा, उसने जोर से ठहाका लगाया! "क्या हुआ?' मैंने पूछा, "डार! डा...
"ठीक है, ये लो फिर अपने हाथ में!" मैंने कहा और एक चुटकी भस्म उसके हाथ में रखनी चाही तो उसने हाथ पीछे कर लिया अपना! अब मै मुस्कुराया! "क्या हुआ? डर ग...
"मेरा वरण कर लो तुम, इसलिए" उसने कहा, "वाह! क्या स्वामीभक्ति है तेरी!" मैंने कहा, "मेरी स्वामीभक्ति?" वो चौंकी! "हाँ! मान गया मै!" मैंने कहा, ...
उसने कोई जवाब नहीं दिया, बस इशारे से पीछे हटने को कहा! मैंने भी हाथ के इशारे से मना कर दिया! "जाता है या नहीं?" उसने पूछा, "क्या करेगी अगर न जाऊ...
"जा हलिया! तेरे जैसे बहुत आये और बहुत गए! जा उसको भेज कायर को! नहीं तो कुत्ते की तरह से खींच के ले आऊंगा उसको, उसकी उस हौदी से!" मैंने ऊँगली उस हौदी क...
"तू बाबा डार है?" मैंने पूछा, "नहीं" उसने उत्तर दिया, "कौन है तू?" मैंने पूछा, "मेरा नाम हलिया बाबा है, मै इस डेरे का सरंक्षक हूँ" उसने कहा, "...
और तभी..........!! और तभी दो लम्बे-चौड़े आदमी प्रकट हुए वहाँ! हाथों में तलवार लिए और चोगा धारण किये हुए! जटाधारी, आँखें दहकती हुईं उनकी! चेहरा क्रोध...
