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"चलो बाबा" मैंने कहा,"अभी चलता हूँ" वे बोले,इतने में वो लड़की और उसकी माँ आये वहाँ, नमस्ते की, और चलते बनीं!"आओ" मैंने कहा,"रुको" वे बोले,और जब वो औरते...
"जी" वो घबरा के बोली,"पढ़ाई-लिखाई नहीं की?" मैंने पूछा,""आठ तक पढ़ी हूँ" वो बोली,बेचारी....ऐसी बहुत हैं साध्वियां, साध्वियां ही कहूँगा, जो गरीबी के कारण...
लिए! और ले आये मेरे पास!"लो जी" वे बोले,"आप खाओ" मैंने कहा,"खाओ तो सही?" वे बोले,"आप खाओ" मैंने कहा,"नहीं खाएंगे?" पूछा उन्होंने,"खा लूँगा" मैंने कहा,...
"ये है वो" बोले वो,"बहुत बढ़िया!" मैंने कहा!"अब पांच दिन आपका ही है ये" वे बोले,"जानता हूँ" मैंने कहा,मैं अंदर गया! बहुत बढ़िया बना था वो क्रिया-स्थल! ब...
"हाँ!" वे बोले!तो हम कोई नौ बजे हुए फारिग! नौ बजे के बाद ही खाने के लिए कहा गया था! बस थोड़ी ही देर में, खाना भी आ गया, हमने खाना खाया, और हाथ-मुंह धो,...
"बहुत तेज! वो भी देगी सी!" वे बोले,जल्दी से पानी के घूँट खींच गए वो!"आप ही खाओ ये! नहीं तो सुबह धुआं निकल जाएगा!" वे बोले!मैं फिर से हंसा!खैर, वो बचा ...
"हाँ जी?" बोले वो,कुछ पढ़ रहे थे अखबार में! चश्मे से नज़रें ढुलकाये हुए मुझे देखा,"यार शाम हो गयी!" मैंने कहा,"हाँ! अभी करता हूँ इंतज़ाम!" वे उठे और चले ...
उन्होंने,"हाँ, वो उज्जैन जा रहे थे उन दिनों" मैंने कहा,"उनको मैंने ही कहा था कि आपको खबर करें" वे बोले,"अच्छा!" मैंने कहा,"फिर आपसे बात हुई थी मेरी, आ...
"हाँ" मैंने कहा,"धो लेते हैं इन्हे" वे बोले,और अब हम वापिस चले वहाँ से, अपने कमरे की तरफ... हम सीधा कमरे में ही आये, जग में से पानी लिया और वो लोकाट...
ऐसे ही सोया पड़ा है! इन वर्षों में किसी ने नहीं जगाया है उसको! दूर एक जगह एक बाड़ा सा बना था, वहां बड़े बड़े पीपल के पेड़ लगे थे, उन्ही पेड़ों के बीच में एक...
कक्ष में आये तो बैठे, मैंने पानी पिया, शर्मा जी ने भी पिया, मैंने अपने जुराब उतारे और जूतों में घुसेड़ दिए, शर्मा जी अपने जुराब उतार रहे थे, उन्होंने भ...
आया, हमें अंदर ले जाने के लिए! हम अंदर चले! अंदर एक जगह पलंग बिछा था, एक पुराने ज़माने का निवाड़ वाला पलंग! कोई लेटा था उस पर, आसपास, मेज़ रखी थीं, मेज़ों...
सुबह हुई!हम उठे! नहाये-धोये और फारिग हुए!सुबह सुबह ही बाबा गिरि आ गए थे हमारे पास! नमस्कार हुई, अब आगे का कार्यक्रम तय हुआ, कोई ग्यारह बजे हमें मिलना ...
"और लाऊँ?" वो बोली,"ले आओ" मैंने कहा,वो फिर से लपक के बाहर दौड़ी!"लगता है शहरी लोग पसंद नहीं इसको" वे बोले,"लगता तो ऐसे ही है" मैंने कहा,हमने गिलास भरे...
और जग ले, चले गए बाहर! जब वापिस आये तो जग हाथ में नहीं था उनके!"क्या हुआ, जग कहाँ है?" मैंने पूछा,वे बैठे, तौलिये से हाथ पोंछे,"क्या हुआ?" मैंने पूछा,...
