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हम चले अब कोठरे की तरफ! खोला, और अंदर गए! सामान रखा! हाँ, बाहर अभी तक गीली मिट्टी की महक आ रही थी! ये माया का प्रभाव था! “सलाद निकालो” म...
खेतों की तरफ! नरेश जी साथ आये थे! और अब हुए वो वापिस! अब मैंने सभी मंत्र जागृत किये! कलुष स्थापित कर लिया! नेत्र पोषित कर लिए! और किया खेत...
“अब कैसे बात बनेगी?” उन्होंने पूछा, “बनेगी” मैंने कहा, और फिर समझाया उनको! और फिर हम चले घर! घर पहुंचे! स्नान किया, और फिर चाय आदि! अब क...
और हम बैठ गए अंदर! “क्या चाहते हैं ये?” उन्होंने पूछा, “पलायन!” मैंने कहा, “क्या?” वे बोले, “हाँ, हम चले जाएँ यहाँ से” मैंने कहा, ”अच्छा” वे...
झक्क से सभी सांप गायब हुए! माया का नाश हुआ! भूमि दिखायी देने लगी! “खेल अभी ज़ारी है” मैंने कहा, सामने देखा, चार सांड! सांड दिखायी दिए! ला...
एक दूसरे के ऊपर रेंग रहे थे! कुछ कुंडली मार बैठे थे और कुछ हिस्स हिस्स की आवाज़ें निकाल रहे थे! भयावह माहौल था! दरवाज़े की कुण्डी खोली, मैंने दरवा...
बज गए बारह से ज्यादा! क्या करें? सोया जाए? हाँ! ठीक! और फिर हम लेट गए! सोने की कोशिश में! आँख बंद की और नींद आयी! वे भी और मैं भी! म...
हम बैठे हुए थे मिट्टी पर! और ऩय बीता, कुछ नहीं! जैसे आरम्भ हुआ था, वैसे ही समाप्त! कुछ नहीं! कोई नहीं आया! “चलो अब” मैंने कहा, खड़ा हुआ, ...
और ये सेवक जाग उठे हैं! “जान गए हो न? अब जाओ यहाँ से” वो बोला, “जाऊँगा तो नहीं बाबा!” मैंने कहा, “क्यों?” उसने पूछा, “दर्शन करूंगा बाबा के” मै...
हाथ में कमंडल! और हस्त-दंड! “कौन हो तुम?” उसने पूछा, मैंने बताया! क्योंकि वाणी में खोट नहीं था उसके! “क्या चाहते हो?” उसने पूछा, “आप कौन ह...
“पहले हम से तो निबट ले?” उसने कहा, और फिर से हाथ आगे किया! अबकी बार उखाड़ने लगा वो मंत्र प्रहार हमारे पाँव! तौतिक भिड़ा! टकरा गए दोनों! जटाधार...
उसने पीछे देखा, एक और आगे आया! वो भी वैसा ही था! उसने भी हाथ आगे किया और झटका दिया! मंत्र प्रहार! फिर से गरम झोंका! फिर से वस्त्र गरम! प...
ठहाका! सभी हँसे! “ये हमारी भूमि है!” वो बोला, “नहीं” मैंने कहा, “चला जा, कहे देता हूँ” उसने कहा, “नहीं जाऊँगा” मैंने कहा, “देह से प्राण हर...
और मैं हुआ मुस्तैद! मैं रुका! एक जगह! और अपने त्रिशूल से एक वृत्त खींचा भूमि पर! “आओ इसमें” मैंने कहा, वे आ गये! “कौन हो तुम?” मैंने पूछा,...
हम निश्चिन्त बैठे थे! आराम से अपनी मदिरा रानी का हुस्न छान रहे थे! वो भी अपने हुस्न की क़वायद से हमको उकसा रही थी! मैं खड़ा हुआ! दरवाज़े की झिरी ...
