Last seen: Apr 29, 2026
और हम आगे चले आगे चले तो एक पेड़ दिखा, बड़ा सा, ये वैवन का पेड़ था, चौड़ी पत्तिया वाला! और भी कई पेड़ थे वहाँ, आपस में सटे हए! जैसे ही उसके नीचे से...
रुके, "क्यों?" बोले नेव्रत! "ये, ये स्थान है किसी साधक का!" मैंने कहा, "साधक का?" पूछा बाबा शैशव ने, "हाँ, किसी महाप्रबल साधक का!" कहा मैंने, "कैसे पत...
और तभी! तभी वे इक्कीस दीये एक साथ बझ गए! भूमि में छिपाए हुए सामग्री के अवयव, सभी दहक उठे। मुझे बड़ी ही प्रसन्नता हुई। लगा, मेरा मन-माफ़िक़ काम हो गया!...
आग जला ली थी, बैठे थे उसके पास ही, मुझे ये विचार अच्छा लगा, मैं और शर्मा जी, पास में ही से, कुछ लकड़ियाँ ले आये, कुछ फूस और सूखी हुई घास, और थोड़ी पास...
चुका था, पलकें सफेद हो चली थीं उसकी, खाल लटक रही थी, आँखों में मोतिया भी आ चुका था, वो बैठा हुआ था वहाँ! मैं आया उसके पास, उसने मुंह उठकर, देखा मुझे, ...
जैसे ही खोले, मेरे सामने वो ही मंदिर था! मैं गया वहाँ तक, मंदिर, करीब सात फीट ऊंचा होगा, अंदर कोई मूर्ति नहीं थी, बस पत्थर पड़े थे, गोल गोल, नदी के ही...
ऐसे क्यों? कारण जानना ही होगा! 'एक मिनट शर्मा जी!" कहा मैंने, मैं खड़ा हुआ, गया एक जगह, और अब दुहित्र मंत्र पढ़ा, नेत्र पोषित किये, और खोले नेत्र! ...
बोला, तो इस बार मुंह से बात नहीं करनी!" कहा मैंने, मुस्कुरा पड़ी वो! तभी चाय लेकर, सहायक आ गया, चाय दे गया दो कप, "चाय बोली थी क्या?" पूछा मैंने, "हाँ...
और आ गयी पंचमी! मैं बैठा था शर्मा जी के साथ कमरे में, "आज आएगी वो?" बोले वो, "बाबा ने तो कहा था!" कहा मैंने, "देखते हैं,आ जाए तो ठीक, नहीं तो फिर महीन...
कोई नहीं संसार में! वे भी नहीं? कोई गान्धर्व भी नहीं, कोई सखी, सहचरी, वो भी नहीं? ऐसा कैसे सम्भव है। "ठहरो कन्न्या?" बोले बाबा शैशव अब! नहीं सुना, और ...
कोई देखे, तो बस, वहीं का हो कर रहा जाए! ऐसा दृश्य था! फिर सफेद प्रकाश फूटा! और प्रकाश से घिरी हुई वो कन्या, नीचे उतरने लगी! पानी में, रंग ही रंग! ...
ही चाय पी थी, "ये नेपाल क्यों बुला रहा था?" पूछा शर्मा जी ने! "इसकी नीयत सही नहीं लगी मुझे" कहा मैंने, "देख कैसे रहा था!" बोली काम्या! "तुम्हारे बारे ...
दिन पड़ा था काटने को, क्या किया जाए? चलिए विंध्य-वासिनि ही चला जाए! दर्शन भी हो जाएंगे और समय भी कट जाएगा, भोजन भी वहीं कहीं कर ही लेंगे! मेरा प्रस्ता...
निकल जाते हैं वापिस, आते हैं पूनम को?" कहा मैंने, "हाँ, ठीक" बोले वो, "ठीक है बाबा!" कहा मैंने, "और तैयारियां कर लेना!" बोले वो, "ठीक है बाबा!" कहा मै...
वो, पानी, न तो भाप बना था, और न ही सूखा था! और पत्थर, एकदम गर्म! "क्या हुआ?" सुनंदा ने पूछा, "उठा के देखो!" कहा मैंने, अब उसने भी उठाना चाहा। जैसे ही ...
