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“क्या क्या है संसार में!” वे बोले, “अद्भुत!” मैंने कहा, फिर हम सो गए! आ गयी नींद! सुबह करीब आठ बजे आये नरेश जी! आवाज़ दी, हम उठे! नमस्कार...
और चले गए बाहर! जूते पहने, और वापिस हुए! जैसे ही पलक बंद हुई, वैसे ही घुप्प अँधेरा! न वो पेड़! न कुटिया! न वे दोनों! कुछ नहीं! केवल अ...
“आप ही बाबा आंजनेय हैं?” मैंने पूछा, “हाँ” वे बोले, “प्रणाम” मैंने कहा, “प्रणाम” वे बोले, मैंने साध्वियों को देखा, हमको ही देख रही थीं! “प...
“आओ शर्मा जी” मैंने कहा, और वो चला आगे! फिर से धूप हुई! और मुझे हैरत! “आओ” वो बोला, हम चले, मवेशी रम्भाये! कुटिया आ गयी! “यहाँ हैं वो”...
“सुनो?” मैंने कहा, वे रुके, मुझे देखा, “मुझे ले जाओगे बाबा के पास?” मैंने पूछा, एक दूसरे को देखा उन्होंने! “आज्ञा नहीं है” वे बोले, “आज्ञा...
“कहाँ हैं बाबा?” मैंने पूछा, “समाधि में हैं” मैंने कहा, “कब उठेंगे?” मैंने पूछा, “उठने को हैं” वो बोले, “कब उठेंगे?” मैंने पूछा, “कुछ दिनों ...
वो उसी को काट रहे थे! टुकड़ों में! हमे देखा तो रुक गए! “कौन हो तुम?” मैंने पूछा, इतना सुनना था कि वे दोनों और वो पेड़, गायब! अब कुछ नहीं था वह...
“उद्देश्य? कैसा उद्देश्य?” उन्होंने पूछा, “चेतावनी देने का” मैंने कहा, ”अच्छा” वे बोले, “हाँ” मैंने कहा, घड़ी देखी! रात के बारह से अधिक का सम...
गले में मालाएं! क्रोध में मुझे देखे! मैं खड़ा हुआ! शर्मा जी भी खड़े हुए! उस बाबा ने मुझे देखा, और अपने कमंडल से पानी लिया और फेंक दिया हम पर! ...
कमाल था! “कितने वर्ष हुए?” मैंने पूछा, “इक्कीस” वो बोला, “मुझे ले जाओ वहाँ?” मैंने कहा, “आज्ञा नहीं है” उसने कहा, “कौन देगा आज्ञा?” मैंने पू...
लम्बे लम्बे केश! और ऊंचा कद! “आओ” वो बोला, हम चले, वो ले गया हमे अपने साथ, एक वृक्ष के नीचे, “बैठो” उसने कहा, हम बैठ गये! ये एक चबूतरा स...
कोई भी नहीं था वहाँ! बस मवेशी थे केवल! हम आगे बढ़े! एक नांद आयी, हम रुके, तभी पीछे से एक आवाज़ आयी, “ठहरो” हम ठहर गए, पीछे मुड़के देखा, ...
“चलिए” वे बोले, हम लौटे! और जैसे ही लौटे, हम फिर से धूप में आ गए! पीछे देखा, सब वैसा का वैसा! हम चकित! फिर से मुड़े! मवेशी फिर से हमे द...
कुछ अन्य चिन्ह भी! अहोई जैसे! शायद माहवर से बनाये गये थे! कुटिया थी सामने! भूमि लीपी गयी थी गोबर से, मिट्टी मिलाकर, ऊपर छप्पर पड़ा था! ...
मवेशी बंधे थे! लेकिन कोई था नहीं वहाँ! कुटिया थीं वहाँ! नांद थीं! गोबर से लीपी हुईं! मवेशी रम्भा रहे थे! “ये क्या है?” उन्होंने पूछा, “म...
