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और तभी, सर्र से कोई वस्तु गुजरी मेरे कान से होती हुई! हम हट गए पीछे, वो वस्तु देखी, तो हाथ की हड्डी थी, कलाई की! "रुको! आप यहीं रुको!" कहा मैंने, औ...
तो देखा, पीछे एक बड़ा सा गड्ढा था! उसे भी बेरहमी से मार दिया गया था! अब प्रेत बन कर भी, किलकारियाँ मारना नहीं भूला था वो! "इनका क्या कुसूर था?" बोले व...
और छिड़की मिट्टी उसके ऊपर, हो गया खड़ा वो! "क्या नाम है तेरा?" पूछा मैंने, "कुंदन" बोला वो, "और कौन कौन हैं यहां?" पूछा मैंने, "बहुत सारे हैं" बोला वो...
हैं?" पूछा मैंने, "बहुत हैं" बोली वो, "कहाँ हैं?" पूछा मैंने, "वहाँ" बोली वो, उसने इशारा करके बताया था एक तरफ, दिन में नहीं गए थे हम उधर, "ठीक है मेहा...
और हम लौटे फिर, "लगता है, बस्सु लोढ़ा और हरपाल बंजारा, इनको बुलाया गया होगा मदद के लिए!" बोले वो, "लेकिन गद्दार कैसे वो फिर?" पूछा मैंने, "इनके साथ ही...
कहा उन्होंने, "हाँ, सच है" कहा मैंने, "ये सब, वही हैं" बोले वो, "हाँ, सभी पीड़ित" कहा मैंने, "आओ शर्मा जी" कहा मैंने, और अब हम चले, तभी मेरी कमर मे...
था वो, वो एक मर्द था, कोई बीस-इक्कीस बरस का, लेकिन उसकी टाँगें, जाँघों के पास से काट दी गयी थीं! हइडियां दीख रही थीं, मांस के लोथड़े लटक रहे थे, खुन ह...
जली हई खाल लटक रही थी वहां, जांघ का मांस उलीच दिया गया था, पता नहीं, किस हरामजादे, कमीने ने ऐसा किया था, अरे, स्त्री, पुत्री, पुत्र, इनको भी नहीं मारा...
और तब मैं झुका नीचे, उठायी मिट्टी और पढ़ा मंत्र! अब हुईं पीछे वे दोनों, तलवार झुका लीं उन्होंने, "जवाब दे मुझे?" कहा मैंने, न बोले कोई भी! "बोल?" मैंन...
और हम चले उधर, उस लाश तक पहुंचे, निर्वस्त्र लाश थी उसकी, उसके गुप्तांगों को, जला दिया गया था, दाग दिया गया था, या तो लकड़ी से, या फिर सलाखों से, दोनों...
लगता है, दफनाया गया है" कहा मैंने, "यही कह रहा था मैं" बोले वो, अब हम चले, उन कपालों के ऊपर से ही! हुए पार, 'वो क्या है?" बोले वो, "कोई हौज लगती है" क...
चले गए वापिस, खुश होकर! "मामला कुछ गंभीर लगता है!" बोले शर्मा जी, "हाँ, है कुछ ऐसा ही" कहा मैंने, "कोई प्रेत आदि?" बोले वो, "अभी नहीं कहा जा सकता!"कहा...
ने कुल्हाड़ा मार दिया हो, पाँव सूज गया था! और तो और, घंटे भर में ही, उसके नाखूनों से खून निकलने लगा था, बड़ी हैरत की बात थी! डॉक्टर के पास तक ले जाने ...
और हम, चारों उठ लिए! पहुंचे उनके घर, हाथ-मुंह धोये, पोंछे, जूते उतारे, और कमरे में गए, पंखा चल रहा था, हम बैठ गए वहाँ पलंग पर, ठेठ देहाती कमरा था, दीव...
