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प्राण संकट में आ सकते थे! मेरी गलती का खामियाज़ा शर्मा जी को भी भुगतना पड़ता! हम भागे और आ गए कोठरे में! आते ही फ़ौरन मैंने दहलीज को कीलित किया! ...
आँखें बंद हुईं! और जब खुलीं, तो सामने ही थे हम दोनों! वो क्रोधित! परन्तु मैं नहीं! मैं तो क्षमा मांगने को भी तैयार था! और फिर से दूसरा आघा...
और वही हुआ! वही श्वेत वस्त्रधारी साधू प्रकट हुआ! दूर, थोड़ा दूर! क्रोध में फुनकता हुआ! हाथ में दंड लिए! मोली का गट्ठर लिए! क्रोधित! खा जा...
“चलिए” वे बोले, और हम चल पड़े! सामने गए! रुके! दीप जहां जले थे, वहाँ कोई नहीं था! तो फिर ये दीप? ये कहाँ से आये? किसने जलाये? मैंने आसप...
लेकिन, अब कटे कैसे ये दो दिन? और दूर भी कहाँ, पहले दिन के कुछ घंटे भी शेष थे! बड़ी भारी मुसीबत! क्या करें? कहाँ जाएँ? क्या तफरीह ली जाए? तो...
हम अपने कमरे में आ गए! रात देर तक जागे थे तो आँखों में नींद भरी थी! लेट गए, बिस्तर ने नीद से सुरागरसी की, तो नींद ने हल्ला बोला! और हम सो गए...
घड़ी देखी, बहुत समय हो चुका था! हम वापिस चले! दूर रौशनी छन रही थी हमारे कोठरे की खिड़की से! और हम यहाँ माया की खिड़की से बाहर निकाल दिए गए थे! “च...
कुछ मंत्र पढ़े, और नेत्र बंद किये, यहाँ मैंने फ़ौरन ही महाताम को जागृत किया, और जैसे ही उसने अपना हाथ आगे किया, टनाक! टनाक की जैसे आवाज़ हुई! ...
पूर्णिमा आने में अभी तीन दिन थे! अब मारा जिज्ञासा ने दंश! हुआ बेहाल! जल्दी आये पूर्णिमा! जल्दी! कैसे कटे समय? कैसे? “जाओ लौट जाओ” आवाज़ आ...
“कब तक?” मैंने पूछा, “पूर्णिमा तक!” उसने कहा, हां! अब बनी थी बात! यही तो मैं पूछना चाहता था! कोई नहीं बता रहा था! मंजरी ने बता दिया! मैं...
सामने चार साधिकाएं खड़ी थीं! जैसे पूजन के लिए आयी हों! मैं भागा उस तरफ! शर्मा जी भी! आज कोई मंत्र जागृत नहीं किया था! इस से वे गंध लेकर भाग ज...
भोजन किया और अपना सामान लेकर चल दिए हम खेतों की तरफ! नरेश जी लौट गए! आज कोई वार नहीं! न पानी! न गड्ढे! और न ही टीले! सब शांत! कोठरे तक आ...
“क्या क्या है संसार में!” वे बोले, “अद्भुत!” मैंने कहा, फिर हम सो गए! आ गयी नींद! सुबह करीब आठ बजे आये नरेश जी! आवाज़ दी, हम उठे! नमस्कार...
और चले गए बाहर! जूते पहने, और वापिस हुए! जैसे ही पलक बंद हुई, वैसे ही घुप्प अँधेरा! न वो पेड़! न कुटिया! न वे दोनों! कुछ नहीं! केवल अ...
“आप ही बाबा आंजनेय हैं?” मैंने पूछा, “हाँ” वे बोले, “प्रणाम” मैंने कहा, “प्रणाम” वे बोले, मैंने साध्वियों को देखा, हमको ही देख रही थीं! “प...
