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या वे! अट्ठहास! भयानक अट्ठहास! “आओ??” मैं चिल्लाया! त्रिशूल लहराया! डमरू बजाया! पीछे लौटा! पाँव थिरक रहे थे! कमर थिरक रही थी! जैसे व...
वो भौंचक्के! मैं खड़ा हुआ! त्रि-जूट शक्ति का आह्वान किया! जागृत हुई! और त्रिशूल सम्मुख किया! पछाड़! पछाड़ खायी उन्होंने! कटे पेड़ से गिरे नी...
हा! हा! हा! हा! हा! अट्ठहास! “आओ! आओ सेवकों आओ!” मैंने चिल्लाया! नृत्य! आनंद! औघड़-आनंद! विद्या-आनंद! “आओ!!!” मैं चिल्लाया! हा! हा! हा!...
फिर चार प्रकट! वृद्ध! चारों ही वृद्ध! कुछ फेंका! बवंडर उठा! सांप, बिच्छू और ज़हरीले जंतु प्रकट हुए! भाग छूटे मेरी तरफ! मैंने बैठा! भूमे...
पहलवान! काली सफ़ेद दाढ़ी! कुछ फेंका उसने! मुझसे टकराया! और भस्म! अट्ठहास! फिर से कुछ फेंका! फिर भस्म! फिर से फेंका! फिर से भस्म! अब ...
उपहास! मैंने त्रिशूल लहराया! और उनके सम्मुख फाल किया, मंत्र पढ़ा और!!! और! मंत्र टकराया! और वो दोनों! उड़ चले! आकाश में! और लोप! लोप...
वायु प्रवाह बढ़ गया! मिट्टी उड़ने लगी! और त्रिशूल कर दिया आगे! विस्फोट! विस्फोट सा हुआ! उस से क्रितूर टकरायी! और उसने पछाड़ खायी! अट्ठहास! ...
और चला सामने! “कौन रोकेगा?” मैंने कहा, आरम्भ हुआ मैं जहां से कल छोड़ा था! औघड़-मद! “है कोई?” मैंने चिल्लाया! त्रिशूल लहराए! तांडव-मुद्रा में...
अपनी भी और शर्मा जी की भी! सशक्तिकरण किया! विद्याएँ जागृत कीं! और फिर खेत के मध्य आये! वृत्त खींचा! पूजन किया! अपना त्रिशूल अभिमंत्रित किय...
उनसे मिलने को! अब घिरी रात! मैंने अपने केश बांधे! प्रण लिया! और समस्त तंत्राभूषण धारण कर लिए! फिर शर्मा जी को भी धारण करवा दिए! अब पहुंचे ...
और मुझे सोने दिया उन्होंने, मैं सोता रहा! सोता रहा! दोपहर हो गयी! अब खुली आँख, बारह से ऊपर का वक़्त था! मैं खड़ा हुआ! नरेश जी से नमस्कार ह...
फिर से सलाद! और अब मैं लेट गया! कल की सोचते हुए! रात करवटें बदल रही थी! और फिर नींद आ गयी! सो गया मैं! बाद में कुछ नहीं हुआ! सब ठीक ...
वहाँ पहुंचे! मैंने अपना सारा सामान शर्मा जी को दिया, उन्होंने बैग में रखा! अब अपना चेहरा याद आया, धोना है! “पानी” मैंने कहा, उन्होंने पानी द...
मैंने मिट्टी उठायी! अभिमंत्रित की, और जैसे ही फेंकने लगा, मुझे मेरे मन ने चेतावनी दी! मैंने नहीं फेंकी! खानी पड़ी वो मुझे! मैं रुक गया था! ...
लेकिन त्रिशूल नहीं छोड़ा! मैं उठा, और फिर से हाथ किया, मैं फिर से घसिटता चला गया! फिर से उठा! मुंह में मिट्टी घुस गयी मेरे! केशों में मिट्टी ...
