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फिर से प्रकाश कौंधा! अब कौन? ये कौन? यक्षिणी? या आसुरिक माया? या साक्षात् मेनका? कौन है ये? कांच के सामान देह उसकी! ऐसे सुडौल वक्ष नही...
लाभ! कैसा लाभ! “नहीं” मैंने मना किया! प्रकाश कौंधा! एक नग्न स्त्री! प्रकट हुई! ऐसा स्वरुप! ऐसा कि अप्सरा जैसा! नज़र टिके तो हटे ही नहीं...
जाग गया! जाग गया औघड़! नहीं! कभी नहीं! “जाओ सिद्धानी, जाओ!” मैंने कहा, वो हंसी! एक मूर्ख था मैं उसके लिए! मूर्ख! हाँ मूर्ख ही तो था मैं...
एक एक अंग दैविक सौंदर्य से पूर्ण! ऊंचा कद! चित्ताकर्षक चेहरा! पान के पत्ते सी चिकनी त्वचा! चमकती हुई! मेरे सामने आयी! चलने से उसका वक्ष हि...
लालच दिया मुझे! मैंने धन को लात मारी! हीरे-पन्ने बिखर गए वहाँ! चनक-चनक की आवाज़ें आयीं! मैं हंसा! अट्ठहास! “वाह बाबा देवधर! ये धन! देखो!! ध...
“नहीं, तुम नहीं मिल सकते!” वो बोला, “क्यों नहीं मिल सकता?” मैंने पूछा, “नहीं, कोई औचित्य ही नहीं” उसने कहा, मुझे गुस्सा आया! मैंने अपना त्रिशू...
अट्ठहास! खूब अट्ठहास! “कौन है और?” मैंने कहा, और नाचने लगा! मदग्रस्त तो था ही, अब उन्माद भी चढ़ गया! “आओ?” मैंने कहा, और तब! तब एक नौजवान...
अब मैंने त्रिशूल उठाया! भ्रान्डक-महाविद्या का जाप किया! और सम्मुख कर दिया त्रिशूल! बाबा उड़ चले! बहुत दूर! बहुत दूर! फिर प्रकट हुए! फिर ल...
विद्या टकरायी बाबा से! धड़ाम! धड़ाम से गिरे! फिर यकायक उठ पड़े! क्रोध में! क्रोध से देखते हुए! मैंने भी घूरा उन्हें! त्रिशूल सम्भाला! ...
मंत्र पढ़ते हुए! और अग्नि समाप्त! अट्ठहास! महाकाल के गीत! रुद्रपति के गीत! उमाराज के गीत! और वो देखें! यलक विद्या कट गयी उनकी! हा! हा! ...
व्यर्थ क्यों प्राणों की आहुति देते हो?” उन्होंने कहा, अट्ठहास! हा! हा! हा! हा! व्यर्थ? कौन कहता है व्यर्थ! कैसे व्यर्थ?? नहीं! व्यर्थ नह...
आगे जाऊं? लड़ूं? या पीछे हट जाऊं? भाग जाऊं? नहीं! नहीं! नहीं भागूंगा! मैं लडूंगा! अंतिम श्वास तक! भागना नहीं सीखा मैंने! मर जाऊं? ...
मैं बैठ गया! छाती पर थाप देते हुए! फिर खड़ा हुआ! भागा पीछे! मांस उठाया! खाया! चबाया! और मदिरा का घूँट भरा! और निगल गया! तभी! प्रकाश...
“अरुणाज्ञी!” मैंने चिल्लाया! ये विद्या का नाम है! मैंने घोंप दिया त्रिशूल! सीधा उदर में! और अशरीरी था! दूर जा पड़ा! और लोप! अट्ठहास! हा...
शोभ-नृत्य! अंगार नृत्य! शक्त-नृत्य! अट्ठहास! आज नहीं छोडूंगा! किसी को नहीं छोडूंगा! नाश कर दूंगा! आगे भागा! “आओ! देवधर के ** आओ?” मैंन...
