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मित्रो! एक अनुचित निर्णय से सम्पूर्ण जीवन तबाह हो सकता है, ये इसीका उदाहरण है! आखिर क्या मिला उज्जवल को? दरअसल उज्जवल प्यार का अर्थ समझ ही न सका! जीवन...
“अब खड़ा हो यहाँ से माँ के ** इस से पहले कि तेरी छाती फट जाए, जा! जाके इलाज करा अपना!” शर्मा जी ने उसको उठा कर बाहर की तरफ धक्का देते हुए कहा! वो बाह...
“माफ़ कर दो गुरुवार, अब न होगा ऐसा, मै भटक गया था, लालच आ गया था मुझे” उसने अब रोते हुए कहा! “बहन के ** माफ़ी मांग जाके उस लड़के सुभाष से, हमसे क्या फा...
“हाँ, याद है” उसने बताया, “किसलिए आया था वो तेरे पास?” शर्मा जी ने पूछा, “एक प्रयोग करवाने आया था” उसने साफ़ साफ़ कहा, “कैसा प्रयोग?” शर्मा जी ने ...
“अबे सुन माँ के ** बाबा अमली तेरी माँ की ** बहन के ** तू क्या समझता है? हम तेरे मुरीद हैं?” शर्मा जी ने कहा और एक ज़ोरदार झापड़ रसीद किया अमली को! अमल...
रात कटी,सुबह आई, सभी फारिग हुए, बजे थे साढ़े आठ! शर्मा जी ने तभी कॉल कर दी अमली बाबा को! फ़ोन उठाया अमली बाबा ने! तो साहिबानों! कार्यक्रम तय हो गया!...
“आप एक काम कीजिये न? आप मुझे सुबह नौ बजे कॉल कर लीजिये” अमली बोला, “ठीक है बाबा जी” शर्मा जी ने कहा, मै समझ रहा था सब कुछ! शर्मा जी के प्रपंच में ...
“हम तो धन्य हो गए बाबा जी आपके दर्शन पाकर! आपके स्थान पर गए थे, वहीँ से पता चला कि बाबा जी तो चंडीगढ़ जा रहे हैं, अभी अभी निकले हैं!” शर्मा जी ने हाथ ज...
हम वहाँ पहुंचे, ये एक गाँव जैसी जगह थी, यहीं कहीं एक नाला था, वो हमने ढूँढा, मिल गया, ये मुख्य सड़क से करीब सात-आठ किलोमीटर पूर्व में था! जहां ये अमली ...
“एहसान कैसा? किसी कि जान बच जाए तो कैसा एहसान?” मैंने पूछा, “नहीं गुरु जी” उसने कहा, “शुक्र है कि जल्दी खबर लग गयी, देर हो जाती तो अनिष्ट हो जाता”...
“उस मादर** को भी देख लेंगे हम गुरु जी!” शर्मा जी ने कहा, “ठीक है, कल सुबह हम पहले चलते हैं सुभाष के पास और कंचन को सारी सच्चाई से अवगत करा देते हैं,...
उसका ये निर्णय उसके मानसिक-पतन का कारण बना! ये था उज्जवल! उज्जवल प्रेम करता था कंचन से! अटूट प्रेम! परन्तु उसके माता-पिता के निर्णय ने उसको दिग्भ्रमित...
सुभाष के होश आने की खबर जोशी जी के फ़ोन पर आई! ये खबर कंचन के भाई ने दी थी! अब मुझे शीघ्र ही सुभाष के पास जाना था, अतः हम वहीँ की ओर रवाना हो लिए! हम...
मारण मालवा क्षेत्र में प्रचलित है! सुभाष के फेंफडों की नसे फट गयी थीं! मानो शरीर का तीन चौथाई भार फेंफडों पर पड़ रहा था! बेचारा सुभाष! मै बाहर आया, ब...
कंचन ने सर उठाया, उसके होंठ फड़क रहे थे, “कंचन, सुभाष ठीक हो जायेंगे, तुम चिंता न करो” उज्जवल ने कहा, कंचन ने कुछ न कहा! “कंचन” उज्जवल ने कहा, ...
