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लेकिन आज तक सीख नहीं पाया था वो! तभी उन्होंने आलोक को फ़ोन लगाया, उन्होंने सारी बात आलोक को बताई, आलोक को भी हैरत हुई! सौभाग्य से आलोक को मेरे एक जानका...
हर्ष चले तो वो प्रेतात्मा रोते रोते उनकी गाडी में बैठ गयी, हर्ष ने घबरा घबरा के उसको बिठाया पीछे सीट पर, यहाँ विमल की बोलती बंद हो गयी थी, वो आँखें बं...
वो प्रेतात्मा उस ईंट के ढेर पर खड़ी हुई अब और फिर बोली,"कौन हो तुम?" "जी.....जी.......मै हर्ष हूँ" उन्होंने कहा, "कौन हर्ष?" उसने पूछा, अब क्या ज...
और दूसरा मन कहता कि उस से सवाल पूछना जारी रखें! दूसरे मन की विजय हुई और हर्ष ने फिर से सवाल किया,"कौन हो तुम?" उसने फिर जवाब नहीं दिया! वो अधर में अ...
"तब हर्ष को खोमचे से आगे एक औरत बैठी हुई दिखाई दी! एक ईंट के ढेर पर! हर्ष ने गौर से देखा, हाँ! वो वही थी! हर्ष ने विमल के कंधे पर हाथ लगाया, विमल बाहर...
"अभी कोई महीने डेढ़ महीने पहले" हर्ष ने कहा, और फिर हर्ष ने सारी घटना बता दी विमल को! जो भी घटा था उनके साथ! "बहुत हिम्मत वाले हो साहब आप!" विमल ने...
उसके बाद काम ख़तम किया उन्होंने और सभी अपने अपने घर चले गए! रास्ते में हर्ष को उसी औरत के ख़याल सताने लगे! घर पहुंचे, रात हो चुकी थी काफी सो, सो गए! ...
"हमने उस औरत को पार कर लिया, बात आई गयी हो गयी! लेकिन जब हम कोई बीस किलोमीटर आगे गए तो हमे वो औरत फिर से दिखाई दी! वहीँ सड़क किनारे खड़ी हुई! वहीँ औरत! ...
बाद उन्होंने गाड़ी आगे बढ़ाई, शीशे में देखा तो अब कोई नहीं था वहाँ! वो धीरे धीरे गाड़ी चलाते चले गए, फिर आई वो पुलिस-चौकी, वो वहाँ धीमे हुए, वहाँ भी कोई ...
प्रसाद तो चला गया, लेकिन हर्ष के मन में तूफ़ान मचा गया! हर्ष ने और जानकारी जुटानी चाहि! हैरत इस बात की कि उसको डर नहीं था, या उस औरत से डर लग नहीं रहा ...
"साहब, मै अजमेर से निकला था उस रात, गाडी में पीछे कुछ सामान रखा था, जब मै एक खोमचे के पास से निकला तो वहाँ एक औरत खड़ी थी, बदहवास सी" उसने बताया, "क्...
"हाँ साहब, मै आ रहा हूँ" प्रसाद ने कहा, उसके बाद दोनों दफ्तर से निकले और अपने अपने घर के लिए प्रस्थान किया! हर्ष को एक अजीब बेचैनी सी होने लगी थी,कई...
"अच्छा! कहाँ रहते हैं आपके ये भाई?" हर्ष ने उत्सुकता से पूछा, "यहीं! जयपुर में ही रहता है वो, अपना काम है किताबों का उसका" प्रसाद ने बताया, "अच्छा...
करीब पांच छह दिनों के बाद बात आई गयी हो गयी! भूल-भाल गए! फिर से वही दैनिक-दिनचर्या आरम्भ हो गयी उनकी! एक बार की बात है, हर्ष को फिर से एक बार अपने क...
"इंसान ही इंसान के काम आता है श्रीमती जी" हर्ष ने कहा, दरअसल वो अभी तक उस औरत के कहे हुए वृत्तांत में ही उलझे हुए थे! "और मान लो, वही उनकी सहयोगी हो...
