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अब कुर्सी से उठ कर मीनाक्षी हमारे बिस्तर पर आ बैठी थी, चौकड़ी मार! अब हम ऐसे बैठे थे जैसे चार जुआरी बैठा करते हैं! और वैसे वहाँ जुआ ही चल रहा था, जिसे ...
“मै वाराणसी गयी हुई थी, मेरे पति के गुरु जी का आश्रम है वहाँ, वहाँ मुझे एक औघड़ बाबा मिले थे, नाम था धौमन बाबा, उन्होंने मुझे इस बीजक के बारे में बताया...
“कोई औरत आ रही है मिलने” मैंने कहा, “ये साला धन का ही चक्कर है!” वे बोले, “पहले उस से बात कर लें, देखते हैं” मैंने कहा, हम नीचे आ गये कक्ष में! ...
एक दूसरे कागज़ पर अब विश्लेषण के लिए जगह सीमित कर ली, तीन सौ पैंसठ बिंदियाँ और छह में छेद, अर्थात? छह में छेद, क्या ऋतुएं? छह ऋतुएं? ठीक है, मान लिया छ...
“मै वाराणसी गयी हुई थी, मेरे पति के गुरु जी का आश्रम है वहाँ, वहाँ मुझे एक औघड़ बाबा मिले थे, नाम था धौमन बाबा, उन्होंने मुझे इस बीजक के बारे में बताया...
“कोई औरत आ रही है मिलने” मैंने कहा, “ये साला धन का ही चक्कर है!” वे बोले, “पहले उस से बात कर लें, देखते हैं” मैंने कहा, हम नीचे आ गये कक्ष में! ...
एक दूसरे कागज़ पर अब विश्लेषण के लिए जगह सीमित कर ली, तीन सौ पैंसठ बिंदियाँ और छह में छेद, अर्थात? छह में छेद, क्या ऋतुएं? छह ऋतुएं? ठीक है, मान लिया छ...
उठे तो चार बजे थे! “गुरु जी?” शर्मा जी ने टोका, “हाँ?” मैंने पूछा, “यहाँ कोई गड़बड़ चल रही है पक्का!” वे बोले, “लगता तो है” मैंने कहा, “आप कटक...
और वो बेपरवाह सा आगे आगे चलने लगा! और हम पीछे पीछे! बड़ी मुश्किल से रास्ता काटा! और गाड़ी में बैठ गए! पिंडलियों में खिंचाव सा आ गया! लगा जैसे पह...
“क्योंकि इसमें मोर हैं और बंजारों के बीजक में मोर नहीं होते, वहाँ हंस होते हैं” मैंने बता दिया! उसके चेहरे का रंग बदला! मैंने देखा! “और ये कुआँ?...
बीजक साफ़ सुथरा था! अब मैंने उसको देखना शुरू किया! सबसे ऊपर दोनों कोनों में दो मोर बने हुए थे! बीच में एक सांप फन फैलाये बैठा था! उस पत्थर के चारों...
अब हम चले पैदल पैदल! संकरा रास्ता, पथरीला, ऊबड़-खाबड़! किसी तरह से बचते बचाते चलते रहे! “सिद्धेश और जयेश यहीं आये थे?” मैंने पूछा, “हाँ जी” वो बोल...
दरअसल हमारे रहने-खाने का सारा प्रबंध सुनील ने एक जगह किया था, होटल तो नहीं था लेकिन था होटल सा ही! कोई गेस्ट-हाउस सा था! हमने सामान रखा वहाँ, हाथ-...
तीस किलोमीटर! अर्थात जंगल में! “वहाँ बाबा रोमण का अस्थिदण्ड है, ये कैसे पता आपको?” मैंने पूछा, “पता है, मुझे अपने गुरु से पता है, उनको अपने गुरु...
तीन घंटे के बाद उसने एक जंगल के से रास्ते में गाड़ी काट ली, रास्ता कच्चा था! धीरे धीरे चलते हुए वो हमे एक स्थान पर ले आया, यहाँ एक आश्रम सा बना था, अधि...
