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उसने महामंत्र का जाप किया! और मुझ पर प्रहार किया! मेरा त्रिशूल भूमि से उखड कर मेरी अलख में गिरा! मेरे शरीर में असहनीय पीड़ा उठी! उदर में शूल उठा जैसे क...
"हाँ! कार्य सिद्ध!" मैंने कहा! "क्या पता चला गुरु जी?" उन्होंने पूछा, "यही कि ये अरविन्द, उस पद्मानद कि औलाद है!" मैंने कहा, "क्या?" उन्होंने भी...
"लेकिन शर्मा जी, वो मान्त्रिक ज्ञानवान है, तेजस्वी है, अनुभवी है, विवेकशील है, लेकिन वो ऐसा क्यूँ कर रखा है? ये मेरी समझ से बाहर है" मैंने कहा, मित्रग...
वहाँ पहुंची! लेकिन उस मान्त्रिक ने घास के एक तिनके से उसको प्रभावहीन कर दिया! मै अवाक रह गया!!! वो मुस्कुराया! जैसे की मेरे हारने पर उसको ख़ुशी हुई ह...
उस मान्त्रिक ने अपने वस्त्र बदले, कानो में कर्नाक्ष धारण किया और फिर ५ थाल निकाले! उन थालों पर विशिष्ट चिन्ह अंकित किये! सिन्दूर आदि से लिखना शुरू किय...
ऐसा मुझे उन्होंने बताया,मैंने यहाँ पर महाजन-परिवार को सुरक्षा सूत्र में बाँध दिया था, उनकी हालत पूर्ण रूप से सही तो नहीं, हाँ वहीँ तक रुक अवश्य ही गयी...
उसके बाद हम दोनों वहां से उठे और उनसे विदा ले ली! हम अपने स्थान पर पहुंचे, मै रात्रि को अपनी क्रिया में बैठा, ११ बजे थे, मैंने अरविन्द की खोज की, वो...
"ठीक है मै उनको सुबह कॉल कर दूंगा और ये बता दूंगा" उन्होंने कहा, "हाँ शर्मा जी, अब हमारा मिलना आवश्यक है, वो मान्त्रिक मुझे सिद्ध लगता है, देखते हैं...
"अच्छा, चलिए मै देख लेता हूँ, और जो भी परिणाम आता है आपको कल सुबह बताता हूँ, यदि कुछ है तो मै उसका निवारण कर दूंगा, और इस लड़के का भी इलाज अपने हिसाब स...
"कीर्ति चंडीगढ़ की रहने वाली है, वहाँ कोई लड़का चंदर उस से प्यार करता था" उन्होंने कहा, "तो? अब क्या हुआ?" मैंने पूछा, "ये हमको अभी कोई ६ महीने पहले...
"मुझे चिंता लगी रहती है इसकी" उसने कहा और एक झटका खाया, अब दुबारा से प्रेमवती की आमद हो गयी! "अब भी सोच ले, मै भी रहूंगी और ये भी, बोल क्या कहता है ...
उसके दांतों के बीच में लगा के उसका हाथ निकाल दिया! हाथ पर अधिक निशान नहीं पड़े थे! मैंने उसका एक हाथ पकड़ा और दूसरा हाथ शर्मा ने पकड़ा, शर्मा जी ने किश...
स्नेहा ने पीछे हटकर किशन से कहा, "आज तो तो मारा ही जाएगा कमीन के बच्चे!" उसने वहाँ पड़ा हुआ एक पाइप उठा कर किशन की तरफ फेंका, किशन वहां से हट गया, मैंन...
में पुनः प्रवेश करे, किन्तु ऐसा हो नहीं पाटा, तब भी वो वहीँ रहती है, वो प्रत्येक सदस्य के आसपास मंडराती रहती है, और फिर जब दाह-संस्कार होता है तो अब भ...
