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मुझे देख वो हराम के जने खड़े हो गए! मैं वहाँ पहुँच गया! “क्या हुआ?” मैंने उनसे पूछा, अब दोनों आँखें बचाने लगे! “सुनील?” मैंने कहा, “जी?” वो ब...
“कमाल है, कितना साफ़ काम किया है, चांदी का छोर दिखायी नहीं दे रहा!” शर्मा जी ने हाथ लगाते हुए कहा! “हाँ” मैंने कहा, मैंने वहाँ देखा, मजदूर हट गए ...
मैं वहाँ गया! पहुंचा! देखा नीचे एक छड़ी सी थी! मैं गड्ढे में उतरा, छड़ी उठाई, उसको देखा! छड़ी बांस की थी, उसके ऊपर चांदी का मुलम्मा चढ़ा था! क...
“कहाँ जा रहे हो?” उसने पूछा, “आराम करने” मैंने कहा, “आप यहीं रुकते तो….” वो बोला, “क्या फायदा?” मैंने पूछा, वो चुप! जवाब न बना उस से! मैं ...
“हाँ, बस कोई रुकावट न आये” वे बोले, “पता नहीं, क्या है नीचे, कहीं और बड़े पत्थर न हों” मैंने कहा, “हो सकता है, गड्ढा भरने वाले न तो मुक्कमल इंतज़ामा...
और अब मैंने एक पेड़ तलाश किया, मिल गया, फिलहाल दोपहर तक तो छाया का आसरा मिल सकता था वहाँ! “शर्मा जी, आप यहीं बैठिये, मीनाक्षी के साथ” मैंने कहा, “ठ...
बातें कीं उस से काफी, उसने अपने घर के बारे में बताया, वो एक अच्छे धनाढ्य परिवार से सम्बन्ध रखती थी, अब प्रेम-विवाह के कारण सब सम्बन्ध ख़तम थे उसके अपने...
“और मीनाक्षी तुम?” मैंने पूछा, वो चुप! “मीनाक्षी?” मैंने पुकारा, “जी?” वो शून्य में ताक रही थी, बाहर निकली! “क्या करोगी यदि माल निकला तो?” मैं...
“बाबाओं के पास भागता है न, अब कहीं नहीं जाएगा!” वे हंस कर बोले! “आने दो उसको, ज़रा देख तो लें!” मैंने कहा, और फिर हम बैठे बातें करते रहे! शाम का ...
न जाने मुझे क्या सूझी कि मैं उठा, जुराब पहने और चप्प्ल पहन कर मीनाक्षी के कमरे के बाहर जाकर दस्तक दे दी, उसने दरवाज़ा खोल दिया और मुझे नाडर आने को कहा,...
उस साले विजय को बुलाओ यहाँ” वे बोले, सुझाव अच्छा था! “हाँ, सही कह रहे हो” मैंने कहा, “हाँ, बुलाओ उसको यहाँ” वे बोले, “कल कहता हूँ सुनील को” मै...
सुनील चला गया था, और हमने आँखें बंद कर ली थीं, झपकी लेने के लिए, कुछ देर सोये, और तभी फिर दरवाज़े पर दस्तक हुई, शर्मा जी उठकर गए, सामने सुनील और मीनाक्...
“सही कहा!” मैंने कहा, “बताओ कहाँ जाके बसे थे बाबा! वहाँ आज कुछ भी नहीं है, तब क्या हाल होगा!” वे बोले! “तब वो नगर रौशन रहते होगा शर्मा जी! वहाँ के...
“जैसी आपकी इच्छा!” मैंने कहा, उस मूर्ख व्यक्ति की आँखों में धन के अम्बार लग गए! वे दोनों बाबा जैसे अब ख्वाब में अपने आपको मुख्य-संचालक समझ बैठे! औ...
इसका मात्र एक ही अर्थ था! कि यहाँ अब खुदाई करके वो पेटी निकाली जाए! अन्य कोई चारा शेष नहीं था! वर्ष २०१० धौलपुर, राजस्थान की एक घटना! – Part 2 ...
