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वो मुझसे मिलने दिल्ली कई बार आयी, आखिरी बार पिछले महीने नवंबर में आयी थी! आज उसका अपना व्यवसाय है! वो हंसी-ख़ुशी रह रही है! और अब वो बाबा रोमण! मुझ...
चुप! मैंने वो पोटली उसको दे दी! उसने वो पोटली अपने पास रख ली! “चलिए अब” मैंने कहा, “हाँ” वे बोले, मैं गाड़ी की पिछली सीट पर जाकर लेट गया! दर्द ...
और वो पतली उठायी, पोटली भारी थी! मैंने उठायी, सामने देखा, वहाँ कोई नहीं था! चली गयी थी वो सेविका वहाँ से! रहा गया वहाँ केवल सन्नाटा! और ...
“किसलिए?” उसने पूछा, अब मैं अटका! कटकनाथ को तो देना नहीं था, तो फिर किसलिए? मैं अटक गया! किसलिए! इसका क्या जवाब था! कोई भी नहीं! किसलिए चा...
और ज़मीन पर पाँव मारा! पाँव मारते ही घड़े आ गए वहाँ ज़मीन से निकल कर! घूमते हुए! सोने से भरे हुए! अकूत दौलत! कौन नहीं चाहेगा वो! कोई भी चाहेगा! मेरे हा...
“यहाँ” उसने अपने पाँव से ज़मीन पर मारते हुए कहा, “भूमि में?” मैंने पूछा, और तभी मैं उछला! और नीचे गिर गया! किसी ने मुझे धक्का सा दिया था, पीछे ...
वो भी चुप! “किसकी सेविका?’ मैंने पूछा, “बाबा की” उसने कहा, “कौन बाबा?” मैंने पूछा, वो हंसी! “कौन बाबा?” मैंने फिर पूछा, “जिसके लिए तू ...
और फिर जैसे ही पेटी के वो तार काटने लगा, पेटी में आग लग गयी! और अब आवाज़ें आयीं हंसने की! मैं खड़ा हो गया! आग बंद! “कौन है” मैंने कहा, कोई नहीं! “...
“अब तू नहीं बचेगा!” वो चिल्लाई! मैंने अब भी कुछ नहीं कहा! वो अब गुस्से में आयी मेरी तरफ! मैं तैयार था! मैंने महाताम विद्या का पुनश्चः संधान कि...
और तब! तब गड्ढे से एक औरत बाहर आयी! एक खौफनाक औरत! एक बार को तो उसका रूप देखकर मुझे भी सिहरन हो गयी! फुरफुरी सी दौड़ गयी शरीर में! वो औरत बड़ी लम्बी...
मैंने पीछे देखा! कोई नहीं था! आगे जैसे ही मुड़ा, वो गड्ढे के पास खड़ा था! “क्या हुआ ढेणा?” मैंने पूछा, वो चुप! “बस?” मैंने पूछा, अब उसने सुन...
मैंने सुना! “चला जा!” उसने फिर से कहा, मैंने सुना! पर गया नहीं! अब उसे क्रोध आया! “नहीं जाएगा तू?” उसने गुस्से से कहा, “नहीं!” मैंने कहा, ...
लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया! और फिर……… ढेणा! यही नाम बताया था उसने! जल्लाद सा लगता था देखने में! भक्क काला और पहलवान! आज के इंसान की तो एक हाथ...
“जवाब दे?” उसने पूछा, मैंने कोई जवाब नहीं दिया! वो हंसा! बहुत तेज! अट्ठहास! और उसने अब मेरे परिवारजनों के नाम बोलने शुरू किये! सभी के नाम! ह...
उसने सभी को देखा, सभी लोप! “चला जा” उसने कहा, “नहीं जाऊँगा” मैंने कहा, तब उसने अपने वस्त्रों में छिप एक खंजर निकाला! और मेरी तरफ बढ़ी! मुझ पर वार...
