श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

और फिर आगे चल पड़े हम! आगे बढ़े तो एक छोटासा गड्ढा दिखाई दिया, वहाँ भी ऐसे ही अंडे पड़े थे! शायद गोह काफी थीं यहां पर! गोह एकाँकी जीव हैं,मात्र प्रणय-...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

वो! "आ तो सही?" बोला मैं! फिर चला, शर्मा जी भी चले! पहुंचे अजगर के पास! बहुत सुंदर था वो! क्या चित्रकारी सी हो रखी थी उस पर! "ये उत्तर-भारतीय अजगर ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

अद्भुत है ये प्रकृति! खैर, हम उठ गए थे! मैं और शर्मा जी, स्नान, कुल्ला आदि करने, चले नदी की तरफ, बाल्टी ले ली थी, पहुंचे और फिर निवृत हो गए! वापिस आये...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

आराम नहीं मिलता, इसीलिए मैंने और शर्मा जी ने, उस गाड़ी में ही सोना सही समझा! बाबा ने बताया था की जंगली जानवर तो हैं जंगल में, लेकिन नदी किनारे कम ही आ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

"एक ही कपड़ा सा था, उसी से बदन ढका था अपना" बोला वो! "कोई गीत या कुछ कहा था उन्होंने?" बोला मैं, "नहीं जी" बोला वो! "फिर?" पूछा मैंने, "फिर जी, वो पान...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

और जहां धूप पहँच रही थी, वो सुनहरा हो उठा था! मई वहां जंगली आम के पेड़ देखे थे, जंगली आम में गुठली तो होती है, लेकिन छोटी सी, पक कर, चुकंदर के रंग का ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

पूछा मैंने, "नहीं तो?" बोले वो! "तो हमें नदी अपर वाली पहाड़ियों पर नहीं जाना है!" कहा मैंने! "अरे हाँ! सच ही तो है!" बोले वो! 'अगर नदी का ज़िक्र होता,...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

"हम गलत जगह पर हैं!" कहा मैंने! "कैसे?" पूछा उन्होंने! "लेखक नहीं सही कहा था। एकदम सही। चूक हमसे ही हो रही थी, जैसे बाबा अलखनाथ से हई थी!" बोले वो!...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

बोले वो! "हैं तो चार ही!" कहा मैंने, "अब यहीं फंस गए थे हम!" बोले वो! "लाजमी है फंसना!" कहा मैंने, "लीजिये" शर्मा जी ने कहा, मैंने ले ली डायरी! डायरी ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

जाती है! कभी परीक्षण करके देखें आप! पपोरव की तरफ यात्रा करने पर, पेड़, खम्बे आदि आपको धीमी लगेंगी साथ चलते हए, लेकिन दक्षिण की तरफ जाते हए तेज! गति सम...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

"क्या नज़ारा है!" बोले शर्मा जी! "खूबसूरत!" कहा मैंने, "आबादी से दूर!" बोले वो! "हाँ, प्रकृति का सौंदर्य!" कहा मैंने! "बाबा?" कहा मैंने, वे आये, "यही ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

और फिर डायरी रख दी मैंने! खत्म हो गयी थी वो डायरी! कपड़े निकाल लिए थे, धुलवाने थे, इसीलिए! थोड़ी ही देर में, एक महिला आई, कपड़े ले गयी थी फिर, साँझ तक...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

जावटा में स्थापन करेंगे वो!" बोले, "हाँ, पढ़ रहा हूँ!" कहा मैंने, पढ़ा मैंने, कोई चार-पांच पृष्ठ! "ये क्या है?" कहा मैंने, "क्या?" बोले वो, "ये नौफ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

"अब दिमाग मता चला ज़्यादा, सुन आज कपड़े धुलवा दे, कल निकलूंगा यहां से!" कहा मैंने, "कहाँ?" पूछा हाथ से इशारा करके! "बहुत दूर!" कहा मैंने, "वापसी?" बोल...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१० काशी के समीप की एक घटना

और कोई नहीं! कोई नहीं! कौन पुत्र! कौन पुत्री! कौन पौत्र! कोई नहीं! बस यही तीन! बस यही! ये मांगने गए थे बाबा! अगर जाते जिज्ञासा से, तो कोई और बात होती!...

2 years ago
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