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की होगी, गहरी तो नहीं थी, लेकिन पानी भरा था उसमे! "पानी में से जाएंगे क्या?" बोले शर्मा जी, "अरे नहीं! जोंक होंगी! खून चूस लेंगी! इन्फेक्शन हो जाएगा!"...
बहुत है!" बोले वो! "हाँ, ऐसे में तो आधा किलोमीटर ही जान ले ले!" कहा मैंने! "सही बात है" बोले बाबा! "आप कैसे चुप हो शर्मा जी?" पूछा मैंने, "वो चित्र!" ...
ये था एक मंदिर! तीन शिखर वाला एक मंदिर! और साथ में पीछे दो पहाड़ियां थीं! एक पहाड़ी बीच में से खाली थी, जैसे अंग्रेजी का अक्षर एम! यही बात तो गौर क...
दायें और चार बाएं। फिर उन्हें, रस्सियों से बाँधा गया था! योद्धा की लम्बाई-चौड़ाई कम से कम आठ फ़ीट रही होगी! यहां वो साढ़े छह फीट का था! रथ के पहियो...
चित्र सा बना था! बस, अब लगा दंश! अंदर जाना है। लेकिन जाऊं कैसे? कोई मार्ग? पागलपन सा चढ़ गया मुझे! आनन-फानन में,इधर उधर दूं, रास्ता! नहीं मिला रास्...
सुंदर दृश्य! मैंने ज़रा एक ओर जाकर देखा, तो हम ऊंचाई पर थे! कमाल था! हम तो ढलान पर चले थे। ये ऊंचाई कैसे? "ये तो बाहर आ गए हम?" बोले बाबा! "हाँ!" कहा ...
और तभी एक ज़ोरदार सी आवाज़ हुई! जैसे कोई बड़ा सा घंटा बजा हो! कान टर्रा गए हमारे तो! "ये क्या था?" पूछा बाबा ने! "पता नहीं!" कहा मैंने! हम आगे बढ़े! ...
और लगाया जाले के पास! गर्मी से, मकड़ियाँ भाग दौड़ी ऊपर, दायें! चढ़ गयीं एक दूसरे के ऊपर! और हमारा रास्ता हो गया साफ़! मैंने उसी जलती लकड़ी से जाल काट ...
ही तो स्थान नहीं वो? अब हमें जाना था उस गुफा में! "आओ बाबा, अब गुफा में चलें!" कहा मैंने, बाबा को विस्मय था! विस्मय में पड़े थे बाबा! "हाँ, हाँ! चलो!"...
ये क्रिया मात्र औघड़ों के लिए ही नहीं है। ये एक शारीरिक क्रिया है, आप भी कर सकते हैं। इस पृथ्वी पर, मात्र दो प्राणी हैं जो ये क्रिया कर सकते हैं! एक अ...
ऐसी ही लिखी है तो ऐसी ही सही! "आओ" कहा मैंने, और हम चले आगे! जैसे ही हम पहंचे कोई आगे,और रह गए बीस फीट! वे पलटी हमारी तरफ! ये मैं क्या देख रहा था? क्य...
और कभी रुके, कभी चले, पसीने के मारे तर-बतर! कभी कोई सीझाड़ी और कभी कोई! और एक झाड़ी में से जब झाँका तो झटका खाकर पीछे गिरा! एक शब्द न निकला उसके मु...
यहां? सिंह ही है या वायु-प्रतोष? पत्थरों से रगड़ कर जब वायु, विभिन्न कोणों से गुजरती है, तो ये प्रतोष-गुण उतपन्न करती है! यही होगा वो! यही हो सकता था,...
इसी कारण से नीला दीखता है! "पानी में ये पक्षी देखो!" कहा मैंने, "इन्ही की सत्ता है यहां!" बोले वो! हमने कोई आधा घंटा आराम किया, चेहरा धोया और बाल गीले...
फिर आगे बढ़े! अब काफी दूर तक आ गये थे! लेकिन अभी ऐसा तो कोई स्थान नहीं दिखा था! "यहां तो कुछ नहीं है?" बाबा बोले, "मिलेगा!" कहा मैंने, "मिल जाए तो बढ़...
