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"लाजमी है, मैं होता उनकी जगह तो मैं भी आ जाता!" मैंने कहा, "हाँ, सही बात है" वे बोले, "कहाँ रहते हैं ये? गुड़गांव?" उन्होंने पूछा, "हाँ वहीँ" मैं...
"हाँ, ये तो है" मैंने कहा, "अच्छा, आगे?" मैंने पूछा, "गुरु जी हमने ठान लिया कि अब इस घर में नहीं रहेंगे हम, मैंने अपने आसपास के बिल्डर्स से बात की...
"अच्छा, फिर?" मैंने पूछा, "दरवाज़े पर ताला था, कोई चोर तो घुसा नहीं था, अब डर गए हम, किसी तरह से मैंने हिम्म्त की और दरवाज़े पर लगा ताला खोला, अंदर से...
तभी चाय आ गयी, हम चाय पीने लगे! "और क्या हुआ था?" मैंने पूछा, "एक दोपहर की बात है, रूबी नहा कर अपने कमरे में गयी थी, तैयार ह रही थी तो उसके कपड़े क...
"पता नहीं गुरु जी" वे बोले, "क्या होता है उसके साथ?" मैंने पूछा, "हमे करीब तीन ही महीने हुए हैं यहाँ आये हुए, एक आद हफ्ता तो ठीक रहा लेकिन एक दिन ...
"चलो ठीक है" मैंने कहा, पुष्प जी चाय बनाने चली गयीं! "दो भूत हैं जी?" उनके पिता जी ने पूछा, "माता जी ने यही कहा, सुनी सुनायी बात है" मैंने कहा, ...
उनसे पीड़ित हो चुकी थीं, एक जी घर छोड़ के जा चुके थे और एक ये रूबी! और उन्होंने जो नाम बताया था कृतिका, वो भी सही था, अब कड़ियाँ जुड़ने लगी थीं! "रूबी? ...
अब मैं चौंका! "क्या अम्मा जी?" मैंने पूछा, "एक लड़की और उसके दोस्त ने आत्महत्या कर ली थी घर में, फांसी लगा के" वे बोलीं, अब ये एकदम नया और ठोस खु...
"भूत हैं उसमे" वो बोलीं, "भूत?" मैंने पूछा, "हाँ, दो भूत" वो बोलीं, "आपने कभी देखे?" मैंने पूछा, "नहीं" वो बोलीं, "अच्छा, तो सुना होगा आपने"...
भाग चले थे, और एक जगह बाबा को ले जाते समय, नकुल गिर पड़ा! उसको उठाया, तो बाबा को भी होश आ गया! शांत! बेसुध! अनजान से! खूब झिंझोड़ा उन्हें! नहीं बोले क...
स्वर गूंजे! "रमश एहूँ" बोले बाबा! मेरे तो होश ही उड़ने वाले थे! ये हो क्या रहा था? पहले हिना ने प्रश्न पूछे, अब त्राजिरि ने! और बाबा ने उत्तर भी सह...
ये कैसे छुट गया? और फिर, बाबा ने कैसे सीखा? कैसे? कहाँ से? आखिर, आखिर? ये है कौन सी भाषा? मित्रगण! मुझसे क्या छूट गया, इस भाव से मैं पीड़ित हँ! ये एक ...
शरद, अर्थात पतझड़! हेमंत अर्थात शीत ऋतु, शिशिर, अर्थात मनभावन और ठंडा! लेकिन क्या आप जानते हैं? कि एक अहोरात्र में चौबीस घंटे होते हैं, और ये सभी ऋ...
आभूषणों से! भुजाएं, आभूषण ही आभूषण! कमर में आभूषण, नीचे तक आभूषण! घुटनों में आभूषण! पांवों में आभूषण! और रूप! रूप साक्षात देहरूपी कामदेव का! केश सघन, ...
