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श्रुति मेरा मर्दन कर रही थी! वो बार बार उचक जाती, मैं पकड़ता उसे! ये बार बार हुआ, और फिर, फिर मेरे सीने पर गिर गयी वो! हाँफते हुए! पसीनों स...
अपितु स्त्री किया करती है! मैंने श्रुति को और तेजी से उग्र होने को कहा, जितना उग्र होती, उल्टा ही वेग बनता और वेग बनता तो घंट-नटी नहीं प्रवेश करती!...
मैं भागा! अपना त्रिशूल लिया, भौमसिद्धिका मंत्र से अभिमंत्रित किया, और छुआ दिया उसे! विद्युत सी प्रवाहित हो चली! और जाग गयी वो! अब कोई शक्ति न...
लेकिन! चौंका फिर! चौंक पड़ा मैं! ओह! कुशाग्र! बहुत कुशाग्र है ये सरभंग तो! अब समझ गया मैं!! समझ गया! कि क्यों उसने घंट-नटी को चुना! म...
सरभंग काजिया नाचे जा रहा था! फू-फू करता हुआ हर तरफ थूके जा रहा था! ये वही काजिया था जिसने बाबा महापात्रा की साधिका को मध्य-क्रिया में मार डाला था! ये ...
वो सरभंग आगे आया! थूका उसने घृणा से! और लौटा पीछे! "श्रेष्ठ! मान जा! लौट जा!" मैंने कहा, नहीं माना वो! कैसे मानता! अभी तो, बहुत तीर बाकी थ...
मेरा बदन भारी हो चला! साँसें बंधने लगीं! और गले ही पल! एक श्वेत प्रकाश! और आकाश से एक दिव्य-सुंदरी का अवतरण हुआ!! मैं सामान्य हो गया! भागा...
"हे सुर्ना! एक आराध्या! हे देवी! प्रकट हो! प्रकट हो!" बोला वो! और मेरे यहां! आकाश से बूँदें गिरीं! जल की बूंदें! शीतल जल की बूँदें! जैस...
इसीलिए पाँव से लिटाया उसे, उसने पाँव पकड़ लिया मेरा, मैंने आँखें चौडीं करके दिखायीं उसे! वो दरी और लेट गयी! मैंने वो शिशु-कपाल उसे वक्ष पर रख दिया, वक्...
"साधिके?" बोला मैं! और तब उसने एक मंत्र बोला, आधा! शीर्ष मंत्र! और अधो, मैंने पूर्ण किया! हुआ शक्ति प्रवेश! "साधिके?" कहा मैंने! "हा...
"हाँ!" बोली वो! "सामग्री दो!" मैंने कहा, उसने सामान दिया! "वो, वो उठाओ?" बोला मैं, कपाल-कटोरा उठाया उसने! दिया मुझे! "परोसो!" बोला मैं,...
सागर-वासिनी ब्रह्मसुर्ना एक कालकेय महाशक्ति है! एक अत्यंत रौद्र और विध्वंसक प्रकृति वाली अजेय महाशक्ति है! चौंसठ रात्रि इसकी साधना है! इक्कीस बलिकर्म ...
वो हंसा! ऐसा हंसा जैसे अभी फट पड़ेगा! "धन्ना पर बहुत घमंड है न तुझे?" बोला वो! उसने अपने दम्भी मुख से मेरे दादा श्री का नाम लिया? ऐसा साहस? जी...
"कंका! माँ! कंका!! मैंने चिल्लाया! और तभी दूसरी तरफ से प्रचंड वायु वेग चला! मैं नीचे गिरते गिरते बचा! अरिक्षयिका आ पहुंची थी! खनक सी गूंजी...
"साधिके?" मैंने चिल्लाया! वो भागी मेरी तरफ! मेरे कंधे पर हाथ रखा, और ले गयी अलख की ओर! वहां! वहाँ सर ज़मीन से छुआए वो श्रेष्ठ, मंत्रोच्च...
