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अजगर जैसा! एकदम काला! स्याह काला! नीले रंग की आभा बिखेरता! वो और आगे आया! करीब तीन मीटर! लहरा कर! भाग कर! और अब! हम लेटे! ...
वो और आगे आया! करीब पांच मीटर! अब पांच मीटर ही दूर था वो! फन बंद किये! लेकिन उसका सर, बहुत बड़ा था! मेरे सर से भी बड़ा! हाँ! एक ...
चमकता हुआ! बड़ा सा! मेरे सीने बराबर! ये बड़ा ही विचित्र नज़ारा था! एक इच्छाधारी के सामने, दो मानव! वो सहस्त्र वर्षों से, इस संसार मे...
बैठ गए, दोनों हाथ जोड़े हुए! वो और करीब आया! तभी एक भीनी सी सुगंध आयी, कैसे बताऊँ वो सुगंध आपको! फिर भी! कोशिश करता हूँ! आपने कभी ...
समय हो गया स्थिर! हम एक दूसरे के सामने थे! वो सांप! वहीँ खड़ा था! आधा शरीर उठाये! खड़े हम भी थे! आधा शरीर झुकाये! उसकी मणि का प्रकाश...
भक्क काला! चाँद के प्रकाश और मणि के प्रकाश में, नीला दीख रहा था! सांप घूमा, और हमे देखा! उसके नेत्र ज्वाला की तरह थे! काँप से रहे थे...
और गौर से देखा! सांप तो दिखायी नही पड़ा, बस वो प्रकाश ही दीख रहा था! अलौकिक प्रकाश था वो! अद्वित्य प्रकाश! अब नहीं रुका मैं! और मैं च...
परन्तु, हमारी आँखों में नींद नहीं थी! कल रात जो देखा था, वो भूले नहीं, भूल रहा था! कैसे भूला जाता! अभी सोच ही रहे थे हम, अपना अपन...
साफ़ की मछलियां! और धो लीं! छीछड़े वहीँ तालाब में फेंक दिए! डोर लपेटीं और फिर चल दिए! अब जलाई आग! और मछलिया भूनने को रखीं! खुश्बू मस्त...
उस गड्ढे में डाल दी! शर्मा जी का काँटा, फिर से चारा लगा कर फेंक दिया पानी में! और तभी, बाबा हरी सिंह ने डोर खींची! उन्होंने भी कोई आधा किल...
और कांटे फेंक दिए! मैंने भी फेंक दिया! केंचुआ, आधा लगाया जाता है, और आधा लटका रहने दिए जाता है, ताकि मछली को हरकत दिखायी दे, और वो उसको...
अब वे निशान, जंगल में चले गए! यहाँ घास-फूस थी, अब मुश्किल थी! तो अब फिर वापिस हुए! "देख आये निशान?" बाबा ने पूछा, "हाँ, देख आये" मैंने ...
वहाँ पहुंचा! न तो वहाँ कोई बिल था, न कोई पत्थर! न कोई टूटा शहतीर! न कोई पेड़! हाँ! वहाँ रेत में, निशाँ बने थे, उसी नाग के, न...
उनको भूनने को रख दिया! मसाला आदि ले कर आये थे वो! जंगल के खिलाड़ी थे! अब होता भरपेट भोजन! और फिर भोजन हुआ तैयार! गर्मागर्म परोसा गया! ...
"क्या?" मैंने पूछा, "कोई खरगोश मिल जाए, या फिर कोई जल-मुर्गी!" वे बोले, "अच्छा! अच्छा!" मैंने कहा, और बाबा अपना झोला ले कर चले गए! जंगल मे...
