Last seen: Apr 6, 2026
यहां कोई वायु नहीं!आकाश में बदली ने,ऐसा भयंकर और खौफनाक रूप ले लिया था कि,अपने आप ही इंसान ठंड खा बैठे!मैंने कपड़े झाड़े,और पानी पिया,भम्म की आवाज़ हुई,औ...
सांस रुक गयी मेरी तो!कहीं पसली ही न टूट जाए एक आद!छूटा उस से,"अब जाती हूँ मज्जू!" बोली वो,मुझे, मेरे माथे पर चूम लिया,पकड़ने चले थे मछली,हाथ आ गयी व्हे...
"मैं तो जाउंगी!" बोली वो!"नहीं!" कहा मैंने, अनुभव क्र. ९३ भाग ९"नहीं!" बोला मैं,"देख, कह दिया न?" बोली वो,मुझे ही धमका रही थी वो पहलवानन!कैसे बला पड़...
"मज्जू नहीं जानता?" बोली वो,मेरी एक जटा पकड़ते हुए!"नहीं!" कहा मैंने,"मरद, पक्का मरद!" बोली वो,"मतलब?" पूछा मैंने,"तूने सुहंगा को फेंका, मैं आई!" बोली ...
और एक बड़ा सा जूड़ा बना लिया!"अब ठीक है न?" बोली वो,"हाँ!" कहा मैंने,"हाँ! ऐसे बोला कर!" मेरे सर पर हाथ मारते हुए कहा उसने!उसने तो हाथ मार, यहां मेरा भे...
वो फिर हंसी!अपन एक चुटीला, पकड़ा और मेरी तरफ हाथ कर, हिलाया उसने!वो अंदर आ खड़ी हुई थी! हंस रही थी! लेकिन एक बात कहूँगा, चेहरे पर कहीं भी, शत्रुता के लक...
तो मिमियाया न जाए उस से!"आ तो सही?" बोली वो,"नहीं!" कहा मैंने,"नहीं?" बोली वो,"हाँ, नहीं!" कहा मैंने,"डर लगता है?" बोली नस कर!"नहीं!" कहा मैंने,"तो आ ...
उठा-पटक कर देती वो शर्तिया ही!ऐसी भीमकाय औरत,मैंने न देखी थी कभी पहले!वो आई, और रुकी ठीक हमारे सामने,अपना एक चुटीला पकड़ा हाथ में,और देखने लगी हम दोनों...
मैं नीचे बैठा,शर्मा जी को जगाया,वे जागे, और सब समझ गए!ढूंढने लगे उसे!"चली गयी!" कहा मैंने,"हाँ" बोले वो,कपड़े झाड़े मैंने उनके,"क्या हुआ था?" पूछा मैंने...
तो उसने मेरी गर्दन की खाल पकड़ ली,आगे आई, महक, उठी,मेरी आँखें भारी हुईं तभी!और अगले ही पल,मुझे भर लिए अपनी बाजुओं में,पत्थर जी जकड़न थी वो!जैसे, मुझे अप...
"सुहंगा!" बोली वो,अब जैसे ही मैंने नाम सुना,मैं चौंका!नाम सुना था मैंने,पढ़ा भी था, लेकिन ध्यान नहीं दिया था!सुहंगा काम-कन्या होती है!बंजार-विद्या में ...
कांपते ही उनका शरीर मेरे हाथ से फिसलता चला गया!वे नीचे बैठते चले गए!मेरे होश उड़े!मैंने फौरन नब्ज़ देखी उनकी!चल रही थी,हताक्षि-नाड़ी की जांच की,चलने लगी ...
नीचे हुई खड़ी! फूलों पर,और उन बांदियों ने अब, उसके वस्त्र उतारने आरम्भ किये,वस्त्र उतरते, और लोप हो जाते,वो नग्न हो गयी,अब गहने भी उतार लिए गए उसके!अब ...
छाती पर मुक्के मारे!"धीमणा! क्यों अपनी दुर्दशा को आमंत्रण दे रहा है तू!" बोला वो,"तेरी मौत को आमंत्रण दिया है मैंने!" बोला वो,"धीमणा! तू अभी तक नहीं स...
गुदा-मार्ग में पीड़ा होने लगी, अपान-वायु संचार होने लगा हम दोनों को ही,अंडकोषों में सूजन आ गयी,पेट में शूल सा उठ गया!छाती में जैसे धुआं भर गया!श्वास ले...
