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उसने आवाज़ दी उस धीमणा को!और धीमणा उठ खड़ा हुआ!अब वे सारे हँसे!आया शम्भा मेरे पास,रुका कोई चार फ़ीट पर,मैं भभक गया था उस समय!मैंने फिर से मूलांश पढ़ा,और द...
और जैसे ही फेंकता मैं,वो रन्या, अपने नख़लिस्तान के लिए कूच कर गयी!शर्मा जी का हाथ पकड़ा!वे जैसे नींद से जागे,मेरा हाथ पकड़ा,"ठीक हो?" पूछा मैंने,"हाँ, हु...
लेकिन, सब सच था ये, मैं उसके सम्मोहन में जकड़ा था!अब उसने अपने वस्त्र उतारने शुरू किये,श्रृंगार, गहने उतारे,और तब, वो मेरी छाती पर लेट गयी!मैंने भी उसक...
ऐसा तो मैंने कभी पहले नहीं सूंघा था!वो पेड़ कौन सा था, आज तक नहीं जान पाया!हाँ, सुगंध उसके फूलों की,हरसिंगार के फूलों जैसी ही थी!तभी वहाँ एक सफेद मोर उ...
लाल वाले, शरीर में,बड़े थे, वे अधिक तो न थे, लेकिन,स्वर उन्हीं का गूंजता था वहां,पास में ही,जल-कुम्भिका लगी थी,जामुनी रंग के फूल लगे थे उसमे!जैसे उस जग...
स्वर्ण से बने, बड़े बड़े स्तम्भ बने थे वहां,मैं अकेला था वहाँ!हवा चल रही थी,मैं चला आगे तालाब तक, अनुभव क्र.९३ भाग १० (अंतीम)तालाब में, कमल खिले थे,नी...
मुंह में कड़वापन आ गया! मैंने फौरन ही अपना थूक, शर्मा जी के माथे से मल दिया!अब वो आगे आई,सच कहता हूँ!वो अनुपम सौंदर्य-धारिणी थी!"कौन हो तुम?" पूछा मैंन...
कि आपकी आँखें बंद हो जाएंगी सूंघते ही!नेहजि के पत्ते, चबाने में, खट्टे होते हैं,और उसके बाद, मुंह से, चंदन की सी महक आती है!काशेठा के फूल, सफेद और नील...
"तू वापिस लौटा! किसलिए धीमणा?" पूछा मैंने,"बहुत काम बाकी है अभी!" बोला वो,"कैसा काम धीमणा?" बोला मैं,"है अभुण्ड!" बोला वो,न जाने कौन सा काम था!"अभी और...
प्रबल तामसिक है!लाल-पुष्प और लाल-चंदन,लाल वस्त्र पर रख कर,इक्कीस दिन इसका नित्य इक्कीस बार मंत्र-जाप होने से,ऐच्छिक इच्छा पूर्ण हो जाती है!पूर्ण होते ...
ऐसे कम्पन्न,कि खड़ा होना मुश्किल हो आये!घंटियाँ से बज उठीं!जैसे समीप में कहीं,किसी मंदिर में पूजन चल रहा हो!और स्त्री,हवा में उठी,और बीच में रुक,वहीँ द...
आग थमी!और हम भागे,बैग से अस्थि निकाली,और खींचा एक घेरा!और आ गए उसके बीच!अब हम निचिंत थे!ज़मीन में फिर से कम्पन्न हुआ!खड़-खड़ की आवाज़ हुई!ज़मीन में जैसे,अं...
थी तो कोई विशेष ही!तभी हमारे पीछे से आवाज़ आई एक, तर्रद-तर्रद की सी!हमने झटके से पीछे देखा!पीछे की भूमि उठ रही थी ऊपर!उसको उठाया जा रहा था!वो कम से कम ...
और वे इकट्ठे हो गए थे सारे प्रकाश के वो पिंड!तेज वायु बहने लगी!मिट्टी उड़ने लगी!हमें बैठना पड़ा तब!और कोई रास्ता नहीं था हमारे पास!चेहरे दूसरी तरफ घुमा ...
मुक़ाबले में तो अव्वल ही रहता है! अहिराक्ष समान ही बल होता है इसमें! लेकिन अहिराक्ष आसुरी शक्ति है, बलधामा है और लड़ने में कोई सानी नहीं उसका! हाँ, ये फ...
