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									shribhairav.com Forum - Recent Topics				            </title>
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            <description>shribhairav.com Discussion Board</description>
            <language>en-US</language>
            <lastBuildDate>Sun, 10 May 2026 06:36:42 +0000</lastBuildDate>
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                        <title>महत्वपूर्ण सूचनाएं</title>
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                        <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 04:42:39 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[साइट पर जितने सदस्य है उनका एक व्हाट्स एप्प ग्रुप बना हुआ है जो भी सदस्य नही है अघोर भैरव नामक ग्रुप में वे अपना नाम id 7405540690 पर व्हाट्स एप्प कीजिये आपको ग्रुप में जोड़ दिया जाएगा]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p>साइट पर जितने सदस्य है उनका एक व्हाट्स एप्प ग्रुप बना हुआ है जो भी सदस्य नही है अघोर भैरव नामक ग्रुप में वे अपना नाम id 7405540690 पर व्हाट्स एप्प कीजिये आपको ग्रुप में जोड़ दिया जाएगा</p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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                    </item>
				                    <item>
                        <title>वर्ष २०१२ अलवर रोड़ की एक घटना</title>
                        <link>https://shribhairav.com/community/main-category-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a8-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%98/</link>
                        <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 11:16:56 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[उस रात भी काम ज़ारी था वहाँ, बड़ी हेलोजन लाइट लगायी गयीं थीं वहाँ, काम था एक भवन का निर्माण, ये एक खाली जगह में बनवाया जा रहा था, दूर दूर तक ऐसे ही विशाल भवन बने हुए थे, ये एक फार्म-हाउस का भव...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: 14pt">उस रात भी काम ज़ारी था वहाँ, बड़ी हेलोजन लाइट लगायी गयीं थीं वहाँ, काम था एक भवन का निर्माण, ये एक खाली जगह में बनवाया जा रहा था, दूर दूर तक ऐसे ही विशाल भवन बने हुए थे, ये एक फार्म-हाउस का भवन था, काम जोर-शोर से चल रहा था! मशीन काम पर लगी थीं! काम को चलते कोए दो महीने बीत चुके थे, अब वहाँ पर तीसरी मंजिल का लेंटर डाला जा रहा था! काम निर्विघ्न रूप से ज़ारी था!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">मध्य रात्रि कोई दो बजे दो मजदूर चिल्लाते हुए वहाँ आये! उन्होंने चिल्ला चिल्ला के आसमान सर पर उठा लिया, ठेकेदार आया दौड़ा दौड़ा, देखा दोनों मजदूर घायल थे! सर फट गया था दोनों का, एक की बाजू टूट गयी थी शायद! जिसकी बाजू टूटी थी वो नीचे गिर पड़ा! आनन्-फानन में भीड़ इकट्ठी हो गयी वहाँ पर! जो मजदूर खड़ा था उसकी बोलती बंद थी! वो भी नीचे बैठ गया, ठेकेदार ने देरी न कर उनको अपनी जीप में डाला और अस्पताल की ओर दौड़ लगा दी, दोनों को भर्ती करा दिया गया, अब काम रुक गया था वहाँ पर!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">मजदूरों को अस्पताल में जब भर्ती किया गया तो जो मजदूर होशो-हवास में था उसने एक बड़ी अजीब सी बात बताई थी, उसके अनुसार वो दोनों लघु-शंका निबटाने गए थे वहाँ एक जगह, तभी किसी ऊंचे पहाड़ से आदमी ने आकर उनको उठाया और दो बार पटकी मारी! वो आदमी बोला तो कुछ नहीं बस तेज तेज जैसे गुर्रा रहा था! उसकी इस बात पर किसी को भी यकीन नहीं हुआ, और जिसको हुआ उसने इसको प्रेत-बाधा ही माना! अब तो वहाँ भय का माहौल हो गया था! काहिर, उन दोनों का इलाज कराया गया! उन दोनों के बताये स्थान का एक बार मुआयना करवाया गया ठेकदार के द्वारा! लेकिन दिन में तो वहाँ सबकुछ सामान्य ही था, बस थोड़े बहुत पत्थर पड़े थे वहाँ! और कुछ भी नहीं था वहाँ! खैर, काम शुरू हुआ जी अब वहाँ दुबारा!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">कोई हफ्ता बीता होगा कि एक रात एक मजदूर की पत्नी वहाँ गयी लघु-शंका के लिए, और फिर उसकी वहाँ से जोर से आवाज़ आई, ‘बचाओ! बचाओ!” सभी भागे वहाँ! वहाँ गए तो देखा वहाँ वो खून से लथपथ पड़ी थी! कपडे फाड़ दिए गए थे, नाक-मुंह से खून बह रहा था! उसको उठाया गया और ठेकेदार ने फ़ौरन जीप में डाल उसको भी अस्पताल पहुंचाया! जब उस से पूछताछ की गयी तो उसने भी वहीँ सब बताया जो कि उन दोनों मजदूरों ने बताया था! एक ऊंचा पहलवान जैसा आदमी! पूरा गंजा और पहाड़ जैसा! उसने ही उठा के फैंका था उसे वहाँ से!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">अब तो वहाँ भय व्याप्त हो गया! मजदूरों में कानाफूसी आरम्भ हो गयी! प्रेत का डर सताने लगा सभी को! आखिर में ठेकेदार ने स्वयं जांचने की सोची! उसने अपने दो साथी लिए, पहले</span></p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>वर्ष २०११ जिला गोरखपुर की एक घटना</title>
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                        <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 10:46:05 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[गोरखपुर!
गोरखपुर का एक दूरस्थ श्मशान!
लोगों की आवजाही तो थी वहाँ लेकिन सुबह शाम के वक़्त काफी कम रहा करती है, अक्सर आसपास रहने वाले ही लोग आ जाएँ तो अलग बात है, नहीं तो यातायात कम ही हो जाय...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: 14pt">गोरखपुर!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">गोरखपुर का एक दूरस्थ श्मशान!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">लोगों की आवजाही तो थी वहाँ लेकिन सुबह शाम के वक़्त काफी कम रहा करती है, अक्सर आसपास रहने वाले ही लोग आ जाएँ तो अलग बात है, नहीं तो यातायात कम ही हो जाया करता है वहाँ! इसमें मैं शमशान भी नहीं कहूंगा, ये एक डेरा कहा जा सकता है, उस दिन मैं यहाँ दिन में करीब एक बजे पहुंचा था, ये दूर-दराज में बसाया हुआ एक डेरा था, था तो काफी पुराना लेकिन दो भाइयों के बीच तनातनी होने से उसका समग्र विकास नहीं हो पा रहा था! मेरी जानकारी वहाँ रहने वाले औघड़ बाबा धनी राम से थी, वे मेरे पुराने जानकार थे, मैं अक्सर नेपाल जाते समय उनसे अवश्य ही मिलता था, शहर यहाँ से दूर था, और जल्द ही सवारी पकड़ना ज़रूरी था, लेकिन फिर भी निकलते निकलते रात के नौ बज चुके थे, मुझे गोरखपुर में अपने एक जानकार के यहाँ रुकना था और उसके बाद ही मेरी अगले दिन वापसी थी दिल्ली के लिए, मैं बाहर आया विदा लेकर तो साथ में बाबा धनी राम का एक सहायक औघड़ बाहर तक छोड़ने आया, हम जैसे ही दरवाज़े पर पहुंचे, एक महिला वहाँ खड़ी थीं, वे हमको देखते ही हमारे पाँव छूने पहुंची, वे मेरी माता समान थीं, मैंने फ़ौरन ही अपने पाँव हटा लिए और उनको पकड़ लिया, उनकी आँखों में आंसू भर आये उसी क्षण, मुझे बहुत अटपटा सा लगा! शर्मा जी को भी बड़ा अजीब सा लगा!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“क्या बात है माता जी?” मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“अरे छोड़िये ना? ये पागल है, सबसे अपनी बेटी के बारे में पूछती है, यहीं आ जाती है सुबह सुबह और फिर जो भी निकलता है उसके पाँव पकड़ कर उस से यही पूछती है” वो औघड़ बोला,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">मैंने कोई ध्यान नहीं दिया उसकी बात पर!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“चल! चल यहाँ से? दिमाग खराब करके रख दिया है इसने!” वो औघड़ बोला,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“रुक जाओ” मैंने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">वो रुक गया!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“हाँ माता जी? क्या बात है?” मैंने पूछा,</span></p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>वर्ष २०११ काशी की एक घटना</title>
                        <link>https://shribhairav.com/community/main-category-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a8%e0%a4%be/</link>
                        <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 10:07:02 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[बेहद उन्मत्त रात्रि थी वो! चिताएं धधक रही थीं! औघड़ नृत्य कर रहे थे! साधिकाएं मदमत्त होकर काम-प्रसाद बाँट रही थीं! और मदमत्त औघड़ लिप्त थे अपने अपने क्रिया-कलापों में! गुट बने हुए थे, ये महाश्...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: 14pt">बेहद उन्मत्त रात्रि थी वो! चिताएं धधक रही थीं! औघड़ नृत्य कर रहे थे! साधिकाएं मदमत्त होकर काम-प्रसाद बाँट रही थीं! और मदमत्त औघड़ लिप्त थे अपने अपने क्रिया-कलापों में! गुट बने हुए थे, ये महाश्मशान था, कालरात्रि की रात्रि थी! कुछ साधारण लोग भी आये हुए थे, कोई पूजा करवाने कोई रोग का निदान करवाने और आर्थिक स्थितिओं से उबरने के लिए! मजमा लगा था! मैं एक कोने में बैठा, दुमका के रहने वाले एक औघड़ सुर्रा के साथ किसी मंत्रणा में मशगूल था! सुर्रा जो मुझे बता रहा था वो काफी हैरतअंगेज था! उसके अनुसार काशी के एक औघड़ ने किसी दैविक-कन्या से ब्याह रचाया था और उसके बाद वो कहाँ गया कभी पता नहीं चला! मेरे जीवन में ऐसा वाक़या कभी पेश नहीं आया था, सो चौंकना स्वाभाविक ही था!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कौन थी वो देव-कन्या?” मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“सुना था वो मोहित थी उस पर” वो बोला,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“सुना था? लेकिन थी कौन वो कन्या?” मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“ये नहीं पता” उसने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“सुर्रा, सुनी सुनाई बातों पर यक़ीन न किया कर, फंस जाएगा किसी दिन” मैंने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“उस औघड़ का भाई यहीं है” सुर्रा बोला,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">अब मैं चौंका!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कहाँ है?” मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">तब उसने मुझे एक औघड़ की तरफ इशारा करके बताया, वो औघड़ वहीँ बैठा था, मैंने उसको कभी नहीं देखा था,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कौन है वो?” मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कदमनाथ” उसने बताया,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कहाँ का है?” मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“काशी का” वो बोला,</span></p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>वर्ष २०१० धौलपुर, राजस्थान की एक घटना!</title>
                        <link>https://shribhairav.com/community/main-category-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a6-%e0%a4%a7%e0%a5%8c%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be/</link>
                        <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 08:27:10 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[रात के करीब ग्यारह बजे थे, मैं वहाँ शर्मा जी के साथ पहुँच चुका था, यही समय था बाबा कटकनाथ से मिलने का, बाबा कटकनाथ ने किसी काम से मुझे वहाँ बुलाया था, वहाँ उनका एक स्थायी आवास था, बुज़ुर्ग थे...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: 14pt">रात के करीब ग्यारह बजे थे, मैं वहाँ शर्मा जी के साथ पहुँच चुका था, यही समय था बाबा कटकनाथ से मिलने का, बाबा कटकनाथ ने किसी काम से मुझे वहाँ बुलाया था, वहाँ उनका एक स्थायी आवास था, बुज़ुर्ग थे और उनके कई शिष्य भी थे, एक से बढ़कर एक औघड़! लेकिन उन्होंने मुझे बुलाया था, मैं जब वहाँ पहुंचा था रम्मा जोगन मिली मुझे, उस से नमस्कार हुई और उसने हमें एक कक्ष में बिठाया,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कहाँ है बाबा?” मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“वो अभी आने वाले ही होंगे” उसने बताया,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">रम्मा जोगन की उम्र होगी करीब चालीस के आसपास की, वो बाबा कटकनाथ के साथ बीस बरस से रह रही थी! बाबा कटकनाथ उसको अपनी बेटी की तरह से स्नेह करते थे, उनकी देखरेख वही किया करती थी, बाबा कटकनाथ की कोई संतान नहीं थी अपनी, सो इसी को अपनी संतान मानते थे! रम्मा ने भी बाबा की देखरेख करने में कोई कोताही नहीं बरती थी, और तो और उसने ब्याह भी नहीं किया था, जबकि वो बेहद सुंदर और सुशील थी!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">गर्मी पड़ रही थी दबा कर! पसीनों से तरबतर थे हम वहाँ, मैंने अपनी कमीज के ऊपर के बटन खोले और अपने रुमाल से हवा की, पंखा तो था लेकिन अब वो सेवानिवृति के करीब था!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“ये लीजिये” रम्मा कुछ लेकर आयी दो गिलासों में,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“ये क्या है?” मैंने उसके रंग को देखते हुए पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">दरअसल वो आलूबुखारे का शरबत था! मुझे मदिरा सी लगा! इसीलिए मैंने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“शरबत है!” उसने कहा, और हंसी!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">मैं भी मुस्कुरा गया!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">तभी बाबा अंदर आ गए!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">मैंने गिलास टेबल पर रखा और जाकर बाबा के पाँव छू लिए, शर्मा जी ने भी ऐसा ही किया, उन्होंने हमारे सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">वो बैठ गए एक बिस्तर पर,</span></p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>वर्ष २०१० दिल्ली की एक घटना</title>
                        <link>https://shribhairav.com/community/main-category-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a6-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%a8-3/</link>
                        <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 08:10:04 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[उस लड़की का नाम कंचन था, पढ़ी-लिखी समझदार लड़की, अपना ही व्यवसाय था उसका, वो महिला-वस्त्र , जैसे की सूट, ब्लाउज आदि सिलवाया करती थी और फिर आगे भेज दिया करती थी, उसके यहाँ काम करने वाले करीब पंद...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: 14pt">उस लड़की का नाम कंचन था, पढ़ी-लिखी समझदार लड़की, अपना ही व्यवसाय था उसका, वो महिला-वस्त्र , जैसे की सूट, ब्लाउज आदि सिलवाया करती थी और फिर आगे भेज दिया करती थी, उसके यहाँ काम करने वाले करीब पंद्रह लोग थे, दस लडकियां और पांच पुरुष, तीन, तीस वर्ष के आसपास के और शेष दो पचास वर्ष की उम्र के थे, कंचन की आयु भी कोई सत्ताईस या अट्ठाईस वर्ष ही होगी तब, विवाह नहीं किया था उसने तब तक, सुंदर और हंसमुख लड़की थी कंचन, सारे लोग उस से खुश रहते थे, किसी की हारी-बीमारी पर मदद भी किया करती थी! उसके घर में उसके दो बड़े भाई थे, दोनों ही शादी-शुदा और सरकारी नौकरी किया करते थे, दोनों उसकी भाभियाँ घर पर ही रहा करती थीं, गृहणी थीं वो दोनों,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">कंचन का काम सही चल रहा था, सदा ही संतुलित रहा करता था, हाँ सर्दियों में काम थोडा ढीला हो जाया करता था लेकिन अक्सर उसकी भी कमी पूरी हो जाया करती थी, काम सही ही था, न सावन सूखे न भादों हरे!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">एक बार की बात है, उसके कार्य-स्थल पर एक बार एक औघड़ सा साधू आया, उसने उस से खाना माँगा खाने के लिए, कंचन ने उसको ऊपर घर से एक थाली में खाना डाल कर दे दिया, साधू ने खाना खाया और पानी पीया! फिर कंचन ने उसको पचास रुपये भी दे दिए, साधू खुश हुआ और आशीर्वाद देकर चला गया! कंचन को भी मानसिक शान्ति का आभास हुआ! करीब पंद्रह दिनों के बाद वो साधू फिर आया, इस बार एक और साधू को लेकर, उन्होंने खाना माँगा, कंचन फिर से दो थालियों में खाना डाल कर ले आई, दोनों ने खाया और पानी पीया! फिर कंचन ने उन दोनों को पचास-पचास रुपये दे दिए! दोनों खुश हुए! जो साधू पहले भी आया था उसने अपना नाम बदरी बाबा बताया और जो दूसरा आया था उसने अपना नाम कालू बाबा बताया! उन्होंने बताया की वो काशी के औघड़ हैं, यहाँ आते रहते हैं कभी-कभार! भूख लगी तो खाना खाने आ गए यहाँ पर! कंचन ने इसको अपना सौभाग्य माना! तब बदरी बाबा ने कंचन को उसके सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया परन्तु दूसरे ने नहीं! बल्कि उसने पूछा, “ब्याह हो गया तेरा?’</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“अभी नहीं बाबा” कंचन ने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“क्यूँ?” कालू बाबा ने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कोई योग्य वर नहीं मिला अभी तक” उसने बताया,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कैसा वर चाहिए तुझे?” उसने पूछा,</span></p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>वर्ष २०१० जिला मथुरा की एक घटना</title>
                        <link>https://shribhairav.com/community/main-category-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a6-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a5%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95/</link>
                        <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 12:01:30 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[एक दिन दोपहर की बात है, मैं बैठा हुआ था अपने स्थान में ही, गर्मी अधिक थी तो मैंने खटिया बिछवा ली थी एक पेड़ के नीचे, पेड़ नीम का है वो, काफी बड़ा और घना! धूप छन छन के आती थी और चेहरे पर पड़ती थी...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p> </p>
<p>एक दिन दोपहर की बात है, मैं बैठा हुआ था अपने स्थान में ही, गर्मी अधिक थी तो मैंने खटिया बिछवा ली थी एक पेड़ के नीचे, पेड़ नीम का है वो, काफी बड़ा और घना! धूप छन छन के आती थी और चेहरे पर पड़ती थी! काम कुछ था नहीं, बस अलसाया सा लेटा पड़ा था, हवा गरम तो थी लेकिन पेड़ की छाया सुकून दे रही थी! तभी मेरा फ़ोन बजा, ये शर्मा जी का था, मैंने उठाया, तो उन्होंने कहा, कि उनके एक जानकार मिलने के इच्छुक हैं, कुछ समस्या है उनके साथ, इसी विषय पर बात करना चाहते हैं वो, मैंने हाँ कह दी, और शाम को आने को कह दिया और मैं फिर लेट गया!</p>
<p>उनींदा सा था तो जल्दी ही आँख लग गयी! दोपहर की उस गर्मी में पेड़ से राहत थी और इसीलिए नींद आयी थी!</p>
<p>मैं करीब तीन घंटे सोया!</p>
<p>जब उठा तो हाथों और बाजुओं पर रस्सियों के निशान बन गये थे! लेकिन नींद बढ़िया आयी थी! मैं उठा तो अपने कक्ष में चला आया, फिर से लेट गया!</p>
<p>शाम हुई अब!</p>
<p>गर्मी थी तो सोचा स्नान ही कर लिया जाए, तो स्नान करने चला गया! स्नान किया और आकर बैठ गया फिर से कक्ष में!</p>
<p>और फिर शर्मा जी आ गए, अपने एक जानकार के साथ!</p>
<p>हम बैठे,</p>
<p>परिचय हुआ!</p>
<p>उनका नाम नरेश था,</p>
<p>पानी मंगवाया मैंने और पानी पिलाया उनको!</p>
<p>और उसके बाद मैंने उनसे पूछा, “बताइये नरेश जी, क्या समस्या है?”</p>
<p>उन्होंने सोचा कुछ,</p>
<p>शायद घटनाक्रम याद कर रहे थे!</p>
<p>“हम दो भाई हैं गुरु जी, एक मैं और एक बड़े भाई दिनेश, मैं ओ शहर में रहता हूँ और भी गाँव में, हमारी ज़मीन भी वहीँ है, खेती होती है वहाँ और मुझे मेरा हिस्सा मिल जाता है, लेकिन बड़े भाई ने मुझे बताया कि खेत में कुछ अजीब सा हो रहा है” वे बोले,</p>
<p>”क्या अजीब?” मैंने पूछा,</p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना</title>
                        <link>https://shribhairav.com/community/main-category-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a6-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%98%e0%a4%9f-2/</link>
                        <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 11:15:17 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[प्रिय मित्रगण!
आप सभी को विदित होगा कि मैंने एक घटना लिखी थी, लौहिष यक्ष और धनाद्रि की, यदि आपको पता हो! धनाद्रि पर लौहिष, एक यक्ष प्रेमासक्त हुआ था, और इस घटना में एक स्त्री एक गांधर्व पर ...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: 14pt">प्रिय मित्रगण!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">आप सभी को विदित होगा कि मैंने एक घटना लिखी थी, लौहिष यक्ष और धनाद्रि की, यदि आपको पता हो! धनाद्रि पर लौहिष, एक यक्ष प्रेमासक्त हुआ था, और इस घटना में एक स्त्री एक गांधर्व पर आसक्त हुई! अब कहाँ एक अलौकिक गांधर्व और कहाँ एक मानव स्त्री!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">परन्तु!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">प्रेम कुछ नहीं देखता!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">हो गया!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">सो हो गया!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">अब चाहे जिनात हों,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">प्रेत हों या फिर कोई यक्ष या गांधर्व!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">गांधर्व उप-देव योनि है! इसका कोई सानी नहीं! ये अलौकिक, इच्छा मूर्त करने वाले, अत्यंत बलशाली, सौम्य, सुंदर, रूपवान और संगीत का ज्ञान रखने वाले होते हैं! कला में पारंगत होते हैं!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">राक्षस भी इनका सम्मान करते हैं, दानव-दैत्य आदि भी इनका सम्मान करते हैं ऐसा लिखा हुआ है!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">यक्ष और गांधर्व!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">इन दोनों में अत्यंत लघु अंतर है!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">यक्ष जहां देव-सानिध्य में रहते हैं वहीँ गांधर्व आमंत्रित किये जाते हैं! भारतीय तंत्र-शास्त्र में इनको उच्च-कोटि की परम सिद्धियों में स्थान प्राप्त है! गांधर्व-कन्यायों की तो अनेक लोक-गाथाएं हैं! गांधर्व-विवाह सब सुनते तो हैं परन्तु ज्ञान नहीं!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">ऐसे ही एक गांधर्व विपुल और एक मानव स्त्री इथि की है ये घटना!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">मैं उस समय नेपाल में था जब औघड़ों की जमात लगी थी! कोई दो वर्ष बीते होंगे, सर्दी इतनी कि खून जम जाये! लोहे की टीन की चादर खड़खड़ करती हुई वायु से मिलकर हमसे दगा कर बैठी थी! हवा ऐसे चुभती थी जैसे नश्तर! हालांकि मैंने फौजी जैकेट पहन रखी थी, लेकिन वायु का आघात ऐसा तीव्र था कि सांस जो अंदर गयी थी, अंदर ही विश्राम करती! फेंफड़ों के बीच!</span></p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>वर्ष २०१० गुना मध्य प्रदेश की एक घटना</title>
                        <link>https://shribhairav.com/community/main-category-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%a3/%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a5%a8%e0%a5%a6%e0%a5%a7%e0%a5%a6-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87/</link>
                        <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 09:12:37 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[मै कुछ नहीं बोला तो क़य्यूम भाई की निगाह शर्मा जी की निगाह से टकराई, तो शर्मा जी ने मुझसे पूछा, “क्या लेंगे गुरु जी?”
“कुछ भी ले लीजिये” मैंने कहा,
“बियर ले आऊं?” क़य्यूम भाई ने पूछा,
“नहीं...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: 14pt">मै कुछ नहीं बोला तो क़य्यूम भाई की निगाह शर्मा जी की निगाह से टकराई, तो शर्मा जी ने मुझसे पूछा, “क्या लेंगे गुरु जी?”</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“कुछ भी ले लीजिये” मैंने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“बियर ले आऊं?” क़य्यूम भाई ने पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“नहीं, बियर नहीं, आप मदिरा ही ले आइये” मैंने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">क़य्यूम भाई मुड़े और चल दिए ठेके की तरफ!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“अन्दर बैठेंगे या फिर यहीं गाड़ी में?” शर्मा जी ने मुझ से पूछा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“अन्दर तो भीड़-भाड़ होगी, यहीं गाड़ी में ही बैठ लेंगे” मैंने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">थोड़ी देर बाद ही क़य्यूम भाई आये वहाँ, हाथ में मदिरा की दो बोतल लिए और साथ में ज़रूरी सामान भी, शर्मा जी ने गाड़ी का पिछला दरवाज़ा खोला और क़य्यूम भाई ने सारा सामान वहीँ रख दिया, फिर हमारी तरफ मुड़े,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">“आ रहा है लड़का, मैंने मुर्गा कह दिया है, लाता ही होगा, आइये, आप शुरू कीजिये” क़य्यूम भाई ने कहा,</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">मै और शर्मा जी अन्दर बैठे, एक पन्नी में से कुछ कुटी हुई बरफ़ निकाली और शर्मा जी ने दो गिलास बना लिए, क़य्यूम भाई नहीं पीते थे, ये बात उन्होंने रास्ते में ही बता दी थी, वो बियर के शौक़ीन थे सो अपने लिए बियर ले आये थे, थोड़ी देर में ही दौर-ए-जाम शुरू हो गया, एक मंझोले कद का लड़का मुर्गा ले आया और एक बड़ी सी तश्तरी में डाल वहीँ रख दिया, आखिरी चीज़ भी पूरी हो गयी!</span></p>
<p><span style="font-size: 14pt">ये स्थान था ग्वालियर से गुना के बीच का एक, हमको ग्वालियर से लिया था क़य्यूम भाई ने, हम उन दिनों ललितपुर से आये थे ग्वालियर, ललितपुर में एक विवाह था, उसी कारण से आना हुआ था, और क़य्यूम भाई गुना के पास के ही रहने वाले थे, उनका अच्छा-ख़ासा कारोबार था, सेना आदि के मांस सप्लाई करने का काम है उनका, तीन भाई हैं, तीनों इसी काम में लगे हुए हैं, क़य्यूम भी पढ़े लिखे और रसूखदार हैं और बेहद सज्जन भी!</span></p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://shribhairav.com/community/"></category>                        <dc:creator>श्रीशः उपदंडक</dc:creator>
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